STORYMIRROR

jignesh 💫 💫

Others

4  

jignesh 💫 💫

Others

एक कड़वा सच

एक कड़वा सच

1 min
2





मैं क्या कहूँ उस समाज के बारे में,
जहाँ किसी के घर मातम छा जाए,
तो संवेदना देने से पहले लोग यह सोचने लगते हैं—
“तेरहवीं कब है?”

मैं क्या कहूँ उस सोच के बारे में,
जहाँ बेटी की शादी के बाद
उसकी मुस्कान नहीं देखी जाती,
बल्कि घरवालों की पहली जिज्ञासा होती है—
“ससुराल से क्या-क्या आया?”

मैं क्या कहूँ उन लोगों के बारे में,
जो किसी लड़की को अपनी पसंद से जिंदगी चुनते देख
उसके संस्कार और चरित्र पर सवाल उठाने लगते हैं,
लेकिन वही लोग अपने घर की बारी आने पर
खुद को “समझदार और आधुनिक” बताने लगते हैं।

अजीब समाज है हमारा…
दूसरों के फैसलों पर उंगली उठाने में सबसे आगे,
और अपने फैसलों पर वही उंगली
जेब में रखने में सबसे माहिर।

समाज तब बदलेगा,
जब हम दूसरों को परखना छोड़कर
अपने सोचने के तरीके को परखना शुरू करेंगे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन