दिल की मिल्कियत
दिल की मिल्कियत
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दिल की मिल्कियत ,और यादों के खजाने
मुकम्मल रहती है जिनसे,आंखो की चमक के फसाने।
तन्हाईयों की तल्ख सफर मे ,दिल की अंगड़ाइयों मे,
मचलती सरगोशियों सी ,यादों की फिजायें।
कानों में सूफी संगीत गूंजता है ,दिल के साज पर जो बजता,
अहसासों की तारों को छेड़ ,खुशियों का दरबार है सजता।
कभी आकर बैठिये ,इस दिल की खुशनुमां महफिल में,
तुम शमां -ए-मोहब्बत रौशन करना,हम दिल के झरोंखे में मुस्कुरायेंगे।
कौन कहता है?दिल का कोई वक्त नहीं होता,
देखो हमारी नजर से कभी,इस दिल के बगैर कहां दुनिया इतनी खुबसूरत होती ।
