STORYMIRROR

Krishan Sambharwal

Others

4  

Krishan Sambharwal

Others

द वर्स्ट

द वर्स्ट

1 min
291

मैं बुरा

मेरे कर्म बुरे

मेरा भाग्य बुरा

मेरे जन्म बुरे

बुरा मैं सारा का सारा


ना कुछ होता है

ना करता हूं

जीने से भी अब डरता हूं

सांसे आती जाती है

पल पल घुट-घुट के मरता हूं


कुछ दिया नहीं

ना मिला कभी

बंद होगा ये सिलसिला कभी

भोग ये मेरे कर्मों का

किससे करना फिर गिला कभी


ना नींद रात भर आती है

ना बेचैनी कही जाती है

कब तक यूं ही तड़पूंगा 

अब तो रूह भी घबराती है


खत्म करूँ खुद को कैसे

जब बात ज़हन में आती है

बना बहाने ढेरों फिर

मेरी सोच मुझे बहकाती है


मैं कायर हूँ, कायरता भी

अब मुझसे आंख चुराती है

शर्मा कर मुझपर फिर वो

बड़ी मंद मंद मुस्काती है


पर कब तक यूँ ये खेल चलेगा

खत्म तमाशा होना है

जिसको हंसना फिर हंसते रहना

जिसको रोना सो रोना है


बचा नहीं कुछ कहने को

ना कुछ पास मेरे, जो खोना है

कलम वापसी रखता हूं

जो होना है सो होना है


अल्फाजों से बयां किया

वो बोझ जो दिल पर था भरा

हां मैं हूं बुरा, मेरे कर्म बुरे


बुरा मैं सारा का सारा...


Rate this content
Log in