STORYMIRROR

Kavita Sharrma

Others

3  

Kavita Sharrma

Others

छवि

छवि

1 min
224

आजकल मुखौटों का है कुछ चलन

किस पर यकीन अब करें हम

चिकनी चुपड़ी करके बातें

बनाकर छवि बेदाग अपनी 

ये आजकल के मतलबी साधु बाबा

ठगते हैं मासूम भोले भाले लोगों को

चंदे,दान के नाम पर ऐंठकर उनका पैसा

रहते हैं खुद कितने ऐशो आराम से

ज़रा पूछो कोई इनसे कितनी की है इन्होंने भक्ति

बस हैं ऊपर ऊपर से बाबा जी भीतर इसके दग़ाबाज़ी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन