बूंद आँसू की
बूंद आँसू की
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तू मेरी आँखों में उभर आना
कतरा कतरा बन छलक जाना
होके मेरी पलकों से फिर
तुम मेरे गालों में झूल जाना
फिर थोड़ा ठहर के दे देना स्पर्श मुझे
उस पल को मैं भी जी लूँगा "जाना"
अटक जाना मेरे होठों पे आ कर फिर
और मेरी खामोशी में मेरा दर्द सुन जाना
फिर बहते हुये मेरे सीने में आ कर
लग जाना गले से राहत मेरी
सासों को दे जाना
तू मेरी आँखों में उभर आना
कतरा कतरा बन छलक जाना
