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Pushp Lata Sharma

Others

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Pushp Lata Sharma

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बसंत

बसंत

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मेड़-मेड़ खेत-खेत गाँव-गाँव में समीर

मंद-मंद डोलती विहंस हंस दंग है।


डाल-डाल पात-पात पुष्प चूमते अलिंद

नेह-मेह नीति-रीति भा रही उमंग है।


झूम-झूम प्रात गान गा रहा बसंतदूत

पंख खोल मोर मग्न नाचता अनंग है।


कुंज कुंज है प्रसन्न देख भूमि स्वर्ण पर्ण 

आम्र वृक्ष बौर कोकिला कुहू मृदंग है।



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