"कागज़ भी जब खिल जाते हैं, स्याही से जब भर जाते हैं...! "कागज़ भी जब खिल जाते हैं, स्याही से जब भर जाते हैं...!
ए वक्त आ के बता ना मुझे तुम्हे रोकने का तरीका ताकि मैं भी थोड़ा आराम कर सकूँ...! ए वक्त आ के बता ना मुझे तुम्हे रोकने का तरीका ताकि मैं भी थोड़ा आराम कर सकूँ....
जिनके आगे शीश झुका कर करें हम प्रणाम उस गुरु को नमन है। जिनके आगे शीश झुका कर करें हम प्रणाम उस गुरु को नमन है।
रोज मारता है रोज मरता है रोज प्रस्फुटित होता है रावण। रोज मारता है रोज मरता है रोज प्रस्फुटित होता है रावण।
हर आखिरी पन्ने के बाद, कहीं कोई पहला पन्ना मौजूद मिलेगा...! हर आखिरी पन्ने के बाद, कहीं कोई पहला पन्ना मौजूद मिलेगा...!
जब -जब जीवन में खुशियाँ आई , मुख पर नाम सिर्फ तुम्हारा आया. जब -जब जीवन में खुशियाँ आई , मुख पर नाम सिर्फ तुम्हारा आया.