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Churaman Sahu

Others

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Churaman Sahu

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बहुत दूर

बहुत दूर

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हूँ बहुत दूर सबसे 

लेकिन दिल के क़रीब हूँ सबके

आज जेब तो भारी है

पर ग़रीब हूँ सबसे


कुछ वादे किये हैं अपनो से

उसको निभाने निकल पड़ा हूँ

मज़ा तो अपनो के साथ ही आता हैं

वरना भीड़ में भी यहाँ अकेला खड़ा हूँ


आज भी याद हैं मुझको

रोटी को बाँट कर खाया करते थे

आज सबको बाँट कर रोटी कमाने 

निकल पड़ा हूँ 


हूँ बहुत दूर सबसे 

पर दिल के हूँ क़रीब सबके!






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