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Surendra kumar singh

Others

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Surendra kumar singh

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बहना ही तो है

बहना ही तो है

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बहना ही है तो

हवा के साथ साथ बहें।

न डूबने का जोखिम

न जलने का डर

न रात की झंझट

न उजाले का संकट

न दिखने का बहाना

न बिछड़ने का संत्रास।


बस बहते रहें

इस गली से उस गली तक

विध्वंस से रचना तक

रचना से निर्माण तक

मुस्कराते हुये

लोगों को छूते हुये

गुजर जायें।


सुबह से शाम तक

छोड़ते हुये

अपने बहने का एहसास

घुलते हुये स्नेहिल स्पंदन में

बहते हुये

हवा के साथ साथ।



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