भारत की औरत
भारत की औरत
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भारत देश की औरत
रहती औरों में ही रत
अपना घर परिवार ही
उसकी असली दौलत।
सीता माँ सा त्याग धरे
उर्मिल सा इंतजार करे
भिड़े यम से सावित्री सी
जब वो पति के प्राण हरे।
सिखा पुत्र को रण कौशल
लौह बना दे तन कोमल
जब बात हो सम्मान की
करे शत्रु पल में ओझल।
ममता की वो मूरत है
रति सी उसकी सूरत है
हर रूप सलोना उसका
भारत की वो औरत है।
