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Himanshu Jaiswal

Others

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Himanshu Jaiswal

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बेटी की कहानी

बेटी की कहानी

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पापा की परी हूँ मैं, हूँ माँ के जिगर का टुकड़ा

दादा की लाडली हूँ मैं, दादी कहती चाँद का मुखड़ा


भैया की प्यारी बहना हूँ, चाचा-चाची का गहना

कहीं नहीं जाना मुझको बस यहीं पर रहना


मिलता मुझको सबका प्यार जितना भैया को मिलता

बढ़ता जाता सबका दुलार जैसे जैसे दिन बीतता


अब दिन बीत गए बचपन के हो गयी मैं सयानी

पापा कहते हैं अब मेरी जिम्मेदारी है निभानी


कहते तुझको तो जाना है किसी दूसरे घर

बस कुछ दिनों का बाकी है यहां तेरा सफर


ऐसी क्यों बनाई है इस दुनिया ने रीत

छोड़ना पड़ता है उनको जिनसे होती है प्रीत


कैसे जाऊंगी मैं माँ पापा को छोड़कर

किसी पराये घर में, अपना घर छोड़कर


पर क्या करूँ ये रिवाज़ को निभाना पड़ेगा

अपना प्यारा घर छोड़ कर जाना पड़ेगा


फिर भी न भूलूंगी अपना ये संसार मैं

दोनों जगह बाटूंगी बराबर प्यार मैं


रखना मुझको अब दोनों घर ख़ुशहाल

चाहे हो मायका मेरा या हो ससुराल


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