STORYMIRROR

Neha Yadav

Others

2  

Neha Yadav

Others

बेदर्द जमाना

बेदर्द जमाना

1 min
165

बड़ी हैरत की बात है

बेटियां जलाई जा रही हैं,

और इंसाफ के नाम पर

क़ातिल के जुर्म दिन बढ़ाए जा रहे हैं।

पहन के चोला राजनीति का

वाह वाह की तलब लगाए जा रहे हैं,

कब तलक शिकार बनेंगी बेटियां या

सिर्फ सत्ता की भूख में बेटियों को सेंक रहे हैं?

आखिर कैसा इंसाफ है न्यायाधीश का

दुष्कर्मियों को दया याचिका देख रहे और

बेटियों को तड़पता छोड़ दिए जा रहे हैं।

बेदर्द जमाने का उसूल बताओ न

ये दर्द तुम्हें हो कुबूल तो बताओ न

हमें जलता देख बाते करते हो

कभी मेरे दर्द में शामिल होने आओ न।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन