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निशान्त मिश्र

Others

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निशान्त मिश्र

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"बड़ी मुश्किल से मिलते हैं"

"बड़ी मुश्किल से मिलते हैं"

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"कभी मुश्किल में पड़ जाओ
तो अपना साथ तुम देना,
यहाँ अपनों में अपने भी
बड़ी मुश्किल से मिलते हैं !

हों कितने भी बुरे हालात
खुद पे तुम यकीं करना,
किसी के दर्द को समझें
बड़ी मुश्किल से मिलते हैं !

न घूमो आंसुओं को आस
की माला बनाकर तुम,
तुम्हारे ग़म खरीदें जो
बड़ी मुश्किल से मिलते हैं !

ये वक़्त की तासीर
बेमौसम बदलती है,
रहें जो एक तबियत के
बड़ी मुश्किल से मिलते हैं !

बनाकर घोसला तिनकों से
ना तुम बेखबर सोना
यहाँ बारिश का कोई
ईमां नहीं होता !"

.....निशान्त

 



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