बचपन
बचपन
1 min
197
ख़ामोश बैठी मैं
ज़िन्दगी में बीते हुए पलों में डूब सी गई थी
कुछ खास थे वो पल
जब दादा दादी की डांट से भी प्यारी सी मुस्कान आती थी
जब मां ने हाथ पकड़ हमें चलना सिखाया
और पापा ने घुड़ सवारी कराना
सफ़र सुहाना होता था
हर पल अनजाना होता था
बड़े भाई बहन तो सारी शैतानियों के सरताज होते थे
फिर से वो पल जीने को दिल करता है
फिर से बचपन में जाने को दिल करता है
हर पल को बेफिक्री में खेलने को दिल करता है
आज फिर से ज़िन्दगी को समझदारी से परे हो कर
बस खुलकर मनाने को दिल करता है
