STORYMIRROR

Shubhra Varshney

Others

3  

Shubhra Varshney

Others

बचपन के किस्से

बचपन के किस्से

1 min
155

अपने बचपन के किस्से हैं,

जिसमें कुछ तेरे कुछ मेरे हिस्से हैं।

वह जो स्कूल के पीछे का बाग था,

बाग क्या स्वप्निल संसार था।


कच्ची अमिया अमरुद जी भर खाते,

कुछ बैठते तो कुछ लंबी दौड़ लगाते।

नीना की टिफिन की पूड़ी के गस्से,

आते हम सबके बराबर बराबर हिस्से।


वो जो मानू की साइकिल प्यारी थी,

हम सबकी शान की सवारी थी।

वो जो काकू के भैया आते थे,

सबको बर्फ का गोला खिलाते थे।


वह मेरे काका का जलेबी लाना था,

तुम सब का जो शोर मचाना था।

वो दिन भी क्या सुहाने थे,

जब हम सब से बेगाने थे।

घर बाहर बजाते बाजा थे,

अजी हम उन दिनों के राजा थे।


Rate this content
Log in