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Manu Paliwal

Others

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Manu Paliwal

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अवशेष है

अवशेष है

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कुछ कथानक अवशेष है,

कुछ अभी भी शेष है,

तुम्हारा होना भी हुआ,

तुम्हारा जाना भी हुआ,

जोर जो इतना रहा वजूद का,

राख में मिलना क्या वजूद का,

बहुत था बनाया बहुत है बिगाड़ा,

शेष रह जायेंगे शायद अवशेष हों,

कुछ कथानक अवशेष है,

कुछ कहानियों में अभी जिन्दा हैं,

कुछ सुननेवाले भी चल बसे,

सूनापन अट्टहास महलों में शेष है,

हों जहां चल पड़ो देखने,

कभी सब थे अब अवशेष है। 


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