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Kavita Sharrma

Others

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Kavita Sharrma

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अश्क

अश्क

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दर्द बन कभी छलक पड़ा

आंसू आंख से बह निकला

सीने में जो था दर्द छुपा 

आज उजागर हो चला

इक इक आंसू है कीमती

भावनाएं हैं इसमें बहती

दर्द बन जब बह जाएं

सारा दुख खुद समेटकर

मन को हल्का कर जाएं।

कभी खुशी में भी आंख

नम ये कर जाएं।


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