अपना घर
अपना घर
1 min
255
तन्हाई में भी किसी कोने से आती है
सबके खिलखिलाने की आवाज़ और कभी
महसूस होता है झगड़े के बाद की शांति का एहसास
तमाम यादों का वहां पर डेरा होता है
बचपन की यादों और जवानी के दिनों का बसेरा होता है
यूँ तो पीढ़ियां बदल जाती है मगर अपना घर अपना होता है
