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मधुशिल्पी Shilpi Saxena

Others

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मधुशिल्पी Shilpi Saxena

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अपना घर

अपना घर

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तन्हाई में भी किसी कोने से आती है

सबके खिलखिलाने की आवाज़ और कभी

महसूस होता है झगड़े के बाद की शांति का एहसास

तमाम यादों का वहां पर डेरा होता है 

बचपन की यादों और जवानी के दिनों का बसेरा होता है

यूँ तो पीढ़ियां बदल जाती है मगर अपना घर अपना होता है


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