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Pushpindra Bhandari

Others

4.5  

Pushpindra Bhandari

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अपना अपना हिस्सा

अपना अपना हिस्सा

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आँगन में

सीढ़ियों पर

आकर बैठ गया

सुनहरी धूप का

एक छोटा सा हिस्सा


शैतान बच्चे की तरह

मेरे देखते देखते

सीढियां चढ़ने लगा ..


और फिर पहुंच गया

मुंडेर पर

झुक कर मुझे

देख रहा था

बुला रहा था ...

इस डर से कि

कहीं पाँव ही न फिसल जाए उसका

मैं भी ऊपर चली गयी

उस के पास


प्यार से पुचकारा उसको

धीरे से मुंडेर से उतारा

और सौंप दिया

सांझ को

जो उसको लेने के लिए

कब से दीवार के साथ

पीठ टिकाए खड़ी थी


बड़ी कृतज्ञ नज़रों से मुझे देख कर

विदा हो गयी , वो सांझ

और गहरे ,काले अंधेरे को

साथ ले कर

मैं आहिस्ता आहिस्ता

सीढियां उतर कर

फिर नीचे आ गयी


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