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S Ram Verma

Others

2  

S Ram Verma

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अद्भुत प्रेम !

अद्भुत प्रेम !

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हां इन्हीं दहकते 

अंगारों के बीच 

मिलता है आश्रय

प्रेम को जैसे 

इसका अर्थ 

भटकता है 

निर्जन वनों में

ठीक वैसे ही 


प्रेम आता है

और ठहर जाता है 

अद्भुत-सा हमारी 

कल्पनाओं से लम्बा

और ऊंचा भी और 

ढूंढ ही लेता है

अपना आश्रय

इन्हीं दहकते 

अंगारों के

बीच यहीं ! 


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