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Shailendra Kumar Shukla, FRSC

Others

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Shailendra Kumar Shukla, FRSC

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अब तुम मिले हो

अब तुम मिले हो

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बहुत इंतजार से अब तुम मिले हो 

सोचता हूँ तुम्हें कैसे चाहूँ, पकडूं

कोई कहे तो कहे, हम तो सहते रहे

अब इस मज़े को बस लेते रहें !


ज़िन्दगी का फलसफा है ये सब 

हर रोज का मरहबा है ये सब 

दौलत की भूख, शोहरत से बड़ी 

हर मर्ज की क्या दवा है ये सब ?


उनके पास वो है जितना 

उसे कहते हैं इनका गहना 

मजाल है कोई रश्क भी हो 

हर गर्ज की दुआ है ये सब !!


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