अब तुम मिले हो
अब तुम मिले हो
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बहुत इंतजार से अब तुम मिले हो
सोचता हूँ तुम्हें कैसे चाहूँ, पकडूं
कोई कहे तो कहे, हम तो सहते रहे
अब इस मज़े को बस लेते रहें !
ज़िन्दगी का फलसफा है ये सब
हर रोज का मरहबा है ये सब
दौलत की भूख, शोहरत से बड़ी
हर मर्ज की क्या दवा है ये सब ?
उनके पास वो है जितना
उसे कहते हैं इनका गहना
मजाल है कोई रश्क भी हो
हर गर्ज की दुआ है ये सब !!
