अब थक जाती हूँ मैं
अब थक जाती हूँ मैं
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जिम्मेदारियों का बोझ लिए
उम्मीदों का थाल सजाए
वक्त का इंतजार करते
अब थक जाती हूं मैं।
पाया तो बहुत कुछ
संजोई बहुत सी यादें
यादों के धागे बुनते
अब थक जाती हूं मैं।
मां की थपकी
पिता का दुलार
दिल के एलबम में समेटे
अब थक जाती हूं मैं ।
बचपन की मस्ती
बाजारों की रौनक
अकेलेपन के सन्नाटों से
अब थक जाती हूं मैं ।
दिन भर धमा चौकड़ी
सहेलियों संग घूमना
गुजरे पलों के साथ चलते हुए
अब थक जाती हूं मैं ।
सर्दियों की गुनगुनी धूप
हाथों से स्वेटर बुनना
ठंड की लंबी रातों से
अब थक जाती हूं मैं।।
