महलों से बड़े हुआ करते थे घर वो मिट्टी के। महलों से बड़े हुआ करते थे घर वो मिट्टी के।
कुछ सपने थे उधार के वो भी आंखों के गढ्ढे में दब गए उड़ने से पहले ही हमारे पर कट गए । कुछ सपने थे उधार के वो भी आंखों के गढ्ढे में दब गए उड़ने से पहले ही हमारे ...
अब वक्त आ गया है यह घड़ी बदली जाएगी। अब वक्त आ गया है यह घड़ी बदली जाएगी।
मेरी हर नादानी को माफकर बस मेरे पास ही रह जाना। मेरी हर नादानी को माफकर बस मेरे पास ही रह जाना।
उम्र साठ हो या फिर पचपन, लगता सभी को प्यारा बचपन। उम्र साठ हो या फिर पचपन, लगता सभी को प्यारा बचपन।
किस्मत से जरा कह दो, अभी तन्हा नही हूं मैं। किस्मत से जरा कह दो, अभी तन्हा नही हूं मैं।