सपने उधार के
सपने उधार के
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कुछ सपने थे उधार के,
वो भी आंखों के गढ्ढे में दब गए
उड़ने से पहले ही हमारे पर कट गए ।
बने जो मुसाफिर उम्मीदों की राह की
बदकिस्मती की बोझ से वो रास्ते भी ढ़ह गए।
उड़ने से पहले ही हमारे पर कट गए
लगाया जो मरहम जख्म पर
ये और गहरे हो गए ।
कुछ सपने थे उधार के
वो भी आंखों के गढ्ढे में दब गए
उड़ने से पहले ही हमारे पर कट गए ।
कुछ थी ख्वाहिशें,
वो भी ख्वाबों में रह गए ।
कुछ सपने थे उधार के
वो भी आंखों के गढ्ढे में दब गए
उड़ने से पहले ही हमारे पर कट गए।
