जब सोचूँ, क्यों मैं जीता हूँ? प्याले अपमान के पीता हूँ, जब दिल-दिमाग का मेल ना हो, जब सोचूँ, क्यों मैं जीता हूँ? प्याले अपमान के पीता हूँ, जब दिल-दिमाग का मे...
मैं ज़िन्दगी के इस कड़वे घूंठ को अकेले ही पिया जाता हूँ। मैं ज़िन्दगी के इस कड़वे घूंठ को अकेले ही पिया जाता हूँ।
बाट देखता जैसे भटके कोई जुगनू बाट देखता जैसे भटके कोई जुगनू
चाय अब चाय नहीं दो घूँट जिंदगी की अमृत सरीखी हो गयी। चाय अब चाय नहीं दो घूँट जिंदगी की अमृत सरीखी हो गयी।
कितना अपमान होगा अब कभी सम्भल नहीं पाएँगे, चलो कोई बात नहीं धौंस जमाएँगे अपनी बात मनवाएँगे। कितना अपमान होगा अब कभी सम्भल नहीं पाएँगे, चलो कोई बात नहीं धौंस जमाएँगे अपनी...
अस्तित्व खो देगी अपना और मृत पड़ जाएगी। अस्तित्व खो देगी अपना और मृत पड़ जाएगी।