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Mukesh Nirula

Writing poems with deep meaning (Do Shabd)

  Literary Colonel

जीवन सफर

Abstract

अपनी मंज़िल पर दिखता हूँ तन्हा मगर क्यों यही अब बनी मेरी पहचान है।

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दर्द

Tragedy

मैं था हैरान इस चलन को देख कर अपनी महफ़िल से मैं रुख्सत हो गया

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शब्दों की गवाही

Drama

ये शब्द गवाही दे देंगे, इसलिये मौन ही रहता हूँ।

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शब्दों की पहुँच

Others

शब्दों की उड़ान

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नज़रिया

Others

नज़रिया 

1    13.5K 11

ट्रिब्यूट

Others

ट्रिब्यूट

1    1.3K 4

जब भी कागज़ पर लिखो

Others

जज़्बात #  ओस # मौसम 

1    14.0K 8

अस्पताल

Others

  बीमारों की भीड़ में, हैं अपने कुछ लोग  रोज़ दवाई खा रहे, दुख को रहें हैं भोग  चारों और हैं सुन रहे, ...

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इंतेज़ार

Others

  है दिल को यह उम्मीद, कि इक रोज़ मिलेंगे  जीवन के कुछ ही पल भी, इक साथ जियेंगे 

1    7.1K 8

जीवन से मोह

Others

अंत समय तक वृक्ष से, रहा था जिन का मोह सूख चुके हैं अंत की, बाट रहे हैं जोह

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लोगों का विश्वास

Others

उनको यह मालूम नहीं, जब पत्थर को तराशा जाता है कोई-कोई पत्थर ही शायद, पूजा के काबिल बन पाता है 

1    6.8K 5

मेरे बाद

Others

चाहे जितनी भी हो मजबूरी, तुमसे मिलने आ जाऊँगा जीवन की सुनहरी धूप में मैं, परछाई बन जाऊँगा

1    6.7K 6

अपनों की बेवफाई

Others

इस जीवन को जब तक था जिया, लोगों से प्यार बढ़ाया था  जब मेरी साँसेंं भी थम सी गयी, क़ब्र पर सबने पहुँचा...

1    1.4K 9

बारिश का मौसम

Others

इस बार ना सावन आऐगा, ना फूल नऐ खिल पाऐंगे  हमको तो ऐसा लगता है, हम बारिश देख ना पाऐंगे 

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नया साल

Others

देखो फिर से खत्म हो रहा, एक पुराना साल  छोड़ गया वो फिर से देखो, इतने सारे सवाल 

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ज्ञान

Others

अगर पा जाएँ जीवन में, हम सब ज्ञान का दीपक  हमारी हर अंधेरी रात फिर, प्रकाशमान हो जाए 

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बेवफ़ाई

Others

शमा की बेवफ़ाई, क्या गुल खिला गई  जलना तो था शमा को, दीपक जला गई 

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मेरे अपने

Others

जो दीप वो ले कर आए थे, उनसे उजाला कर गए  उनके इस जीवन में, फिर से अँधेरा हो गया   

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अपने पराये

Others

जब पास में होंगे सब अपने, आशा के दीप जलाऊंगा  हर रोज़ मेरी होगी होली, दीवाली रोज़ मनाऊंगा   

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तेरी खातिर

Others

रातों के अंधेरों का, अब खौफ़ नहीं मुझको  एक चाँद आसमां का, अब पा लिया है मैंने   

1    6.8K 3

पुरानी यादें

Others

तेरी चीज़ें कुछ पुरानी, जो ना थी कुछ काम की  एक-एक कर वो सभी, कबाड़ी के मैंने नाम की    उन चीज़ों में ब...

1    8.3K 7

सपने

Others

सपने देख देख कर सबकी, उम्र यूं ही गुज़र है जाती  कभी तो मंज़िल मिल जाती है, कभी निराशा हाथ है आती 

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कविता का कारण

Others

जब दूर अँधेरे में मुझ को, आशा की किरण दिख जाऐगी  कागज़ पर मैं कुछ लिख दूँगा, और इक कविता बन जाऐगी 

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भगवन से प्रार्थना

Others

अगले जन्म अगर बनाना, तू मुझको कोई फ़ूल  मेरी इच्छा है यही, बन जाऊं कपास का फ़ूल

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