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Kusum Lakhera

Others

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Kusum Lakhera

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खुशहाल परिवार !

खुशहाल परिवार !

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बिन जड़ के पेड़ हो जाता निर्जीव बेकार !

वैसे ही स्नेह से हीन घर जिसमें न रहता ...

कोई परिवार का सदस्य ...वह बन जाता ..

खंडहर ,बन जाता बस ईंट पत्थर का मकान !!


परिवार के सदस्यों संग घर भी .....

हँसता मुस्कुराता है , बड़ो संग इठलाता है !

बच्चों संग खेलता है , खिलखिलाता है ...

कभी गम तो कभी खुशियों के गीत गाता है !!


जड़ है परिवार के वे बुज़ुर्ग जो अपना सब कुछ ..

प्यार दुलार अनुभव सब सदस्यों पर लुटाते हैं ..

अपने त्याग से बच्चों का खुशहाल भविष्य बनाते हैं !

अपना आशीर्वाद अपना तन मन अपनी सम्पति ...

अपनों के लिए छोड़ जाते हैं , ताकि परिवार की इकाई !

 चलती रहे.....आगे बढ़ती रहे ...जैसे ..पेड़ पौधे ..

फूल ...सृष्टि आगे चलती रहती है ...

परिवार भी इसी तरह आगे बढ़ते रहते हैं ....बशर्ते 

स्नेह की धार हो ...


बिन स्नेह की धार से , बिन प्रेम की बौछार से ..

इन परिवार की बगिया के फूलों को शुष्क होने से ..

बचाने के लिए ..अपने घर के बुजुर्गों को दें सम्मान !

ताकि वे लुटाते रहें ...अपनी छाया ..अपना प्रेम ..

और परिवार के सभी सदस्य सहयोगी व्यवहार से ..

सदाबहार प्यार से हमेशा सुख समृद्धि का गीत गाते रहें !



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