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Meeta Joshi

Others

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Meeta Joshi

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यादें..

यादें..

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फुर्सत के पलों में जब सोचने बैठी,

हसीन लम्हे जिंदगी के कुछ इस कदर याद आए....

वो बचपन का घर और उससे जुड़ी यादें,

मुझे ख्वाबों की दुनिया में बहा ले जाएँ।

वो नीम के पेड़ के नीचे बाबुल की खटिया,

हम बच्चों का कोलाहल,उस घर को महकाए।

आपस की छेड़छाड़ में लड़ना-झगड़ना,

पापा की डांट से मांँ के आंँचल में छुपना।

छोटी की फरमाइश कहीं पूरी ना हो जाए,

चलो उससे पहले अपनी जिद्द रख,एक जंग जीत जाएँ।

फुर्सत के पलों में कैरम व लूडो,

चंपक व पिंकी भी अपनी एक खास जगह बनाएँ।

बीमारी में मांँ के आंँचल की छाया,

आज पापा का गुस्सा भी हमें देख चरमराया।

वो प्यार भरा उनका स्पर्श,

जिसने सारी तकलीफों को चुटकी में जड़ से भगाया।

आज ना वो बचपन है,ना बचपन के वो साथी,

वो खूबसूरत लम्हें जिंदगी के,फिर कभी कोई वापस न लौटा पाया।


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