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तितलियाँ
तितलियाँ
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© Dr Hemant Kumar

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तितलियाँ

बड़े सबेरे

आँख खुलते ही

मेरे कमरे की

खिड़की से बाहर दिखने

लगता है नन्हीं नन्हीं

कोमल पंखों वाली

रंग बिरंगी तितलियों का

हुजूम।

नीले पीले  हरे लाल रंगों

वाले युनिफ़ार्म

कन्धों पर टँगे कुछ हल्के

कुछ भारी थैलों में बन्द

ऊँची उड़ान भरने के सपने

आँखों में फूलों की

रंगीन घाटियों की तलाश

चेहरों पर कुछ कर गुज़रने की तमन्ना

और अटूट आत्मविश्वास भी

बढ़ाता है इन कोमल तितलियों

का सौन्दर्य।

सुबह की नर्म धूप के

फ़ाहों के बीच से

देखते हुऐ इन नन्हीं सुंदर

तितलियों को

मन में पैठ जाता है एक

डर अनजाना सा

कभी कभी

कहीं कोई गिरगिट बिसखोपड़ों

या फिर शिकारी पक्षियों का

निरंकुश झुंड घात न लगाऐ हो

इन मासूम कोमल तितलियों के लिये।

उनके सारे कोमल

सुन्दर प्यारे सपनों और भावनाओं

दूर असीमित नीले आकाश में

उड़ने की तमन्ना को

कुचल  देने को आतुर

तीक्ष्ण पैनी खुरदुरी

लपलपाती जीभ

लाल जलती हुई आँखों वाले

खतरनाक

बिसखोपड़ों और गिरगिटों का झुंड।

पर इन तितलियों की

आँखों में चस्पा

एक पूर्ण आत्मविश्वास की झलक

मात्र करती है आश्वस्त कि,

अब पैने कर लिये हैं

इन मासूमों ने भी

अपने नन्हें कोमल पैरों को

और जहरीले पौधों से उधार लेकर

अपने रंगीन पंखों को

बना लिया है जहरीला और  तीक्ष्ण

जिनका स्पर्श मात्र

कर देगा नेस्तनाबूद

इन खतरनाक

जीभ लपलपाते गिरगिटों के झुंड को।

इसीलिये,

सिर्फ़ इसी लिये तो

अपनी बालकनी में शान्त बैठा हुआ मैं

इन कोमल तितलियों की ऊँची उड़ान

को निहार रहा अपलक अपलक ।

0000

डा0हेमन्त कुमार

आर एस—2/108,राज्य सम्पत्ति आवासीय

परिसर,सेक्टर-21,इंदिरानगर

 

लखनऊ—226016 मोबाइल-09451250698

 

तितलियां कविता डा0हेमन्त कुमार।

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