मेरा गुरु मेरा गुरूर
मेरा गुरु मेरा गुरूर
लोग ढूँढ रहे हैं गुरु को शिक्षक दिवस मनाने को,
यूँ तो रोज़ मिलती है सीख पर तब याद नहीं आता उनका आभार जताने को,
अपने गुरुजनों के लिए बच्चे अनगिनत गुलाब लाते हैं,
फिर न जाने क्यों अपनी माँ को एक फूल देना तक भूल जाते हैं,
एक माँ ही है जो प्रथम गुरु कहलाती है,
जिसके द्वारा तुम्हें सर्वोच्च शिक्षा दी जाती है,
आभार करना है प्रकट तो माँ का करो
क्योंकि जिससे सीख मिले, गुरुजनों का छाया शोर है,
हर ओर ढूँढ आओ मेरी माँ जैसा न कोई और है,
चुका सकूँ तेरा कर्ज़ इतनी मेरी औकात नहीं
तुझे माँ कहूँ या दुनिया
ज़ज्बात हैं बस और कोई बात नहीं ।
माँ तू ही मेरी गुरु और तू ही मेरा गुरूर है
तेरे खातिर तो दुनिया का मुझे हर दर्द मंज़ूर है।।।
हर दर्द मंज़ूर है।।।
