Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
कि पत्थर भी हमारी कब्र से, अब नम निकलते हैं
कि पत्थर भी हमारी कब्र से, अब नम निकलते हैं
★★★★★

© Kavi Abhishek Mishra Aparney

Others Inspirational Romance

1 Minutes   6.8K    6


Content Ranking

मौजों से जो लङता हूँ, किनारे रूठ जाते हैं 
भरी मंझधार में सब के, सहारे छूट जाते हैं 
बिना तेरे मेरे सपने सनम कुछ इस तरह टूटे 
बिछङ कर चाँद से जैसे,सितारे टूट जाते हैं

मेरे सीने से अब तो बस, तुम्हारे गम निकलते हैं 
वो कहते हैं कि हम उनकी गली से कम निकलते हैं 
हम मर कर भी तुम्हारी याद में कुछ इस तरह रोये
कि पत्थर भी हमारी कब्र से, अब नम निकलते हैं

 

 

इश्क़ दर्द ''कवि अपर्णेय''

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..