Kumar Vikash

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4.0  

Kumar Vikash

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हकीकत

हकीकत

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आज का सच तो यह है कि इन्सान को

खुद पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं ,


बस भटक रहे हैं दर-दर चौखट-चौखट

माथा रगड़ रहे हैं !


खुद के किये कर्मों को कभी आँका नहीं

बस चमत्कार की आशा कर रहे हैं ,


हैं परेशान क्यों कि मेहनत से डर रहे हैं

और दोष परवरदिगार पर मढ़ रहे हैं !


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