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Amita Kuchya

Children Stories Classics Inspirational

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Amita Kuchya

Children Stories Classics Inspirational

उसे ईमानदारी भा गयी

उसे ईमानदारी भा गयी

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आज कुछ ज्यादा ही बारश हो रही थी। सुषमा बिस्तर में कंबल और भजिए पकौड़े की प्लेट रखकर आराम से बैठने वाली थी।

उसे लग रहा था ।अब बस बार - बार बिस्तर से उठना न पड़े। उसने सोचा कि शाम के काम निपटा कर फुर्सत से टीवी देखूं !

अब जैसा कि जानती थी कुछ न कुछ ऐसा होता ही है।बार - बार उठना ही पड़ता है। अब बैठने वाली थी कि तुरंत ही डोर बैल बजती है।

तब वह अपनी बेटी को कहती-" कृति जरा देखना तो कौन है बाहर! कौन डोर बैल बजा रहा है।"

कृति उसकी बेटी मन करके कहती अरे मम्मी हम नहीं जायेंगे आप देखो न !

इतना सुनते ही सुषमा उठी, दरवाजा खोला तो देखा कि सामने एक छोटा सा लड़का है।

फिर सुषमा ने देखा कि उसके तन पर गीले कपड़े है,बारिश‌में ठिठुर रहा था, वो कुछ परेशान भी दिख रहा है।

इतनी इंसानियत तो सुषमा में थी।कि वह पूछे क्या हुआ बेटा , क्या काम है। फिर उस गरीब लड़के ने अपना नाम पुन्नू बताया ,कहा -मेरी मां बहुत बीमार है मेरे भाई बहन ने खाना भी नहीं खाया है।इस समय रात बहुत हो गई है मैं काम के बाद घर लौटा तो मैंने देखा मां को बीमार हो गई।

वह पुन्नू केवल ग्यारह साल का लड़का एक चाय की दुकान में काम करता था।उसकी मां बर्तन साफ करने का,और झाड़ू पोंछा का काम करती थी।

अब वह कहने लगा -"आंटी जी मुझे आप दाल और आटा दे देंगी। मैं आपको उसके पैसे भी दे दूंगा। अभी सब दुकानें भी बंद हो चुकी है।मेरे पास सौ का नोट है। मैंने और भी घर के बाहर दरवाजा खटखटाया, डोर बैल भी बजायी पर कोई बाहर नहीं आया ।

आन्टी जी आप मेरी मदद कर दें तो बहुत-बहुत मेहरबानी होगी ताकि बीमार मां के लिए खाना बना सकूं।

सुषमा ने कहा हां-हां क्यों नहीं !

फिर दाल और आटा लेने अंदर चली गई।तब तक उसकी बेटी बाहर आकर देखने लगी कि कौन है! तब उसने देखा कि वो लड़का तो भीगा हुआ गीले कपड़े पहना है।

उसने अपनी मम्मी से कहा- "मम्मी मैं अपने पुराने कपड़े दे दूं ?"

वह कितना ठिठुर रहा है।तब सुषमा को भी दया आ गई, वो कहने लगी - हां- हां दे दे•••

फिर सुषमा ने पहले चाय और बिस्कुट खाने दी। पुन्नू सौ का नोट देने वाला ही था ।तब सुषमा ने मना कर दिया, जब तुम्हारी मां ठीक हो जाए तो तब दे देना। अभी तुम्हें खुद जरुरत होगी। उसके बाद वह कपड़े बदल कर दाल और आटा लेकर चला गया।

कुछ दिनों के बाद वह पुनः पैसे देने आया तो सुषमा को काफी खुशी हुई। कितना ईमानदार है।

तभी उसकी कामवाली गांव जा रही थी। तो उसको कामवाली की कमी खल रही थी।अब उसने सोचा अब कौन सी काम वाली मिलेगी।

इतना ही सोच रही थी तभी पुन्नू बोला-" आंटी जी क्या मैं आपके यहां काम के लिए मां को भेज दूं। ताकि आपकी परेशानी कम हो जाए?" फिर सुषमा के यहां उसकी मां ने काम किया। दिन बाद उसकी मां की जगह पुरानी मेड आने लगी।

इस तरह आज की बारिश को देखकर सुषमा की यादें ताजा हो गई कि कैसे पुन्नू भीगता हुआ आया था।वह कितना ईमानदार भी था। पैसे भी देने आया था। उसकी मां ने कितने अच्छे से काम किया था। और पुनः बालकनी में बारिश‌ को देखते हुए चाय की चुस्कियां लेने लगी।

दोस्तों - ईमानदार लोग बड़ी ही मुश्किल से मिलते हैं, जिन पर विश्वास किया जाए ।इस तरह उसे उसकी ईमानदारी भा गई।


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