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Saket Shubham

Children Stories Drama Thriller


5.0  

Saket Shubham

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टाइम सीरम

टाइम सीरम

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डॉ विमल और उनकी टीम ने आख़िरकार टाइम मशीन के लिये क्वांटम सीरम बना कर तैयार कर लिया था। मोबियस स्ट्रिप के फार्मूला से जनित उस टाइम मशीन की नींव डॉ विमल ने ठीक तीन साल पहले इसी लैब में रखी थी। प्रशिक्षण के उपरांत सफलता का स्वाद चखने को सभी बेताब थे। थोड़ी देर की बातचीत का निष्कर्ष निकाला गया। चूंकि डॉ विमल से बेहतर टाइम मशीन के गणित की समझ वहाँ मौजूद किसी और वैज्ञानिक में नहीं थी। तय किया गया कि आज से ठीक १० साल पीछे जा कर वो वापस आ जायेंगे।

अंततः क्वांटम सीरम लेकर सूट पहनकर डॉ विमल तैयार थे, एक अनोखे सफर पर निकलने को। तीन... दो ... एक ...

और इसीके साथ एक जोरदार करंट का प्रवाह हुआ और डॉ विमल गायब। परीक्षण सफल होता दिख रहा था, उत्तेजित चेहरे अपनी कामयाबी को छुपाये नहीं छिपा पा रहे थे। अब सभी उनके लौटने का बेसब्री से इंतजार करने लगे। १० मिनट से ज्यादा वक़्त बीत चुका था मगर डॉ अभी तक लौटे नहीं थे। चंद मिनटों में माहौल बिल्कुल बदल चुका था। सभी को अब किसी अनहोनी की आशंका ने डरा कर रख दिया था।

उधर डॉ विमल की आँख खुली तो आसपास घने जंगल, ऐसे अजीबो गरीब पत्तों वाले वृक्ष थे जो आज तक ना इक्कसिवीं सदी में देखे गए थे ना ही उनकी तस्वीर देखी गयी थी। नजरें घुमा कर जो नजारा डॉ विमल को दिखा उसने उनकी धमनियों में रक्त संचार को कई गुना बढ़ा दिया था। दरअसल हड़बड़ाहट में आकर एक छोटी सी गड़बड़ी की वजह से १० साल की बजाये डॉ विमल वक़्त में १० हज़ार साल पीछे पहुँच चुके थे। आदिवासियों का समूह हतप्रभ होकर उनकी ओर बढ़ने लगा। तभी उनका ध्यान ख़त्म हो चुके क्वांटम सीरम पे गया। यानि कि जितनी आसानी से वो वहाँ पहुँच गये थे, अब वहाँ से निकल पाना तक़रीबन असंभव था।

डॉ विमल की तीव्र बुद्धि और उपकरण में दिखते समय की वजह से उन्हें ये भांपने में ज़रा भी वक़्त नहीं लगा कि उनका प्रशिक्षण सफल तो रहा था लेकिन वो वक़्त में दस हज़ार साल पीछे आ चुके थे। आदिमानव जैसे दिखने वाले लोग आपस में विचित्र तरह से बात करने की कोशिश कर रहे थे। और उनके हावभाव से डर साफ झलक रहा था। फिर उनमें से एक जिसके हाथ में आग की मशाल थी वो इनकी तरफ डरते-डरते पहुँचा और उसने मशाल से हमला कर दिया। बेहतरीन रेशों और पदार्थों से इसी तरह के मुश्किल वक़्त के लिए बना ये अग्निरोधक टाइम सूट विमल का कवच बना हुआ था । डॉ विमल स्थिर खड़े रहे और ये हमला उनका बाल भी बाँका नहीं कर सका। ये देख कर सारे आदिमानव ने आश्चर्य से एक दूसरे को देखा, फिर शायद अपने सरदार की ओर देखा जिसने मशाल थाम रखी थी।

जब मशाल वाले शख्स ने अपने घुटने टेक दिए और मशाल को विमल के कदमों पर छोड़ दिया तो सारे समूह ने वैसा ही किया। सबने मिलकर इसे भगवान जैसी छवि दे दी थी। डॉ विमल ने भी सोचा कि शायद भगवान बनाने का ये खेल बहुत पुराना है।

चूंकि टाइम सीरम के बिना डॉ विमल अपने वापस जाने की उम्मीद छोड़ चुके थे, तो उन्होंने अपनी बुद्धि और अपनी बनी भगवान की छवि का इस्तेमाल मानव की बेहतरी के लिए लगाने का सोचा।

फिर इस वक़्त में अगर छेड़छाड़ हुई तो उससे होने वाले भविष्य के बदलाव के खतरे पर भी उन्होंने अच्छे से सोचा। लेकिन उत्सुकता और खाली समय जैसे उनकी जान ले रही थी। तो उन्होंने वक़्त के बदलाव के खतरे को टालते हुए सबसे पहले कृषि पर काम करने का सोचा। साथ ही इस वक़्त में टाइम सीरम के विकल्प की खोज भी जारी रखी।

पाँच सालों में उस वक़्त के मानव जीवन को उन्होंने अनेक उपकरण देकर उस वक़्त की काया ही पलट दी। ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने वक़्त को पाँच सौ साल आगे कर दिया हो।

एक दिन वो किसी टाइम सीरम के बारे में सोच रहे थे और उन्हें लग रहा था कि वो इसके करीब भी हैं कि तभी किसी ने उन्हें उनके नाम से पुकारा। खुद का नाम इस वक़्त में सुनना उन्हें हतप्रभ कर दिया।

डॉ विमल को ये समझते देर नहीं लगी कि ये सामने खड़ा सूट वाला मानव भविष्य से आया है।

उस मानव ने इनसे बोला, "आपने समय के साथ छेड़छाड़ किया है और इससे भविष्य में बहुत अच्छे बदलाव तो हुए लेकिन इससे विनाशकारी बदलाव भी हुए हैं। और पृथ्वी का भविष्य अब यहाँ आपकी मौत पर निर्भर करता है। शायद आपकी मौत से ही पृथ्वी बच सकती है।"

इतना कहते ही उसने डॉ विमल को बोलने का वक़्त भी नहीं देते हुए लेज़र बंदूक से सिर पर हमला किया और अगले ही पल वो ज़मीन पर गिरे हुए थे।


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