Rohit Verma

Action Children Others tragedy classics


3.0  

Rohit Verma

Action Children Others tragedy classics


सच्ची बात लेकिन थोड़ी कड़वी

सच्ची बात लेकिन थोड़ी कड़वी

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आप अंधे हैं क्योंकि आप हर किसी के जरिए मूर्ख बन जाते है आप किसी भी विचार से उसको भगवान नहीं बना सकते क्योंकि शारीरिक रूप से वह इंसान है क्या आपने कोई चमत्कार देखा नहीं तो आप भगवान का दर्जा कैसे दे सकते हो मूर्ति वाले को भगवान कह सकते है लेकिन चलते फिरते इंसान को नहीं. आप अपनी तिजोरी खाली करके उनकी तिजोरी भरते है और आप वहीं से उल्लू बनते है क्योंकि आपके दिमाग में विचारों की छाप छोड़ दी होती है. जिससे आपके जरिए खुद का काम निकाल सके. असली वह जिसने चमत्कार दिखाया हो. विचार आपका दिमाग नहीं चलाते अर्थात् आप खुद चलाते हैं . मूर्ति वाले के चरण में कुछ डाला वह काम तो आ जाएगा लेकिन चलते फिरते इंसान के चरण में डालोगे वह सोच समझ कर काम आएगा. जो विचारों का पैसा ले वह विचार ही किस काम क्या? आपकी उल्लू बनने की प्रक्रिया बचपन से चालू हो जाती है. कभी भी विचारों की परिभाषा से ना चले चलना है तो खुद की परिभाषा से चले. इंसान को न किसी भी भगवान ने बनाया चाहे किसी भी जात के हो ये तो आदिवासी जीवन की परंपरा है जो हमने अपने पूर्वजों से सुनी है. क्योंकि हर वर्ष नए नए युग का आरंभ हुआ


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