STORYMIRROR

Kumar Vikrant

Others

4  

Kumar Vikrant

Others

पापा का उपहार : प्रांप्ट संख्या १ किताब

पापा का उपहार : प्रांप्ट संख्या १ किताब

4 mins
399

"मम्मी मेरी एक किताब यहाँ रखी थी आपने देखी है क्या?" आरती ने उदास आँखों से अपनी मम्मी की तरफ देखते हुए पुछा। 

"बेटा इस घर में किताबो के ढेर के अलावा तेरी पापा कुछ छोड़ गए है, देख ले चारो तरफ किताबे ही किताबे बिखरी हुई है।" निर्मला देवी रसोई में अपने काम में उलझे-उलझे बोली। 

"मम्मी क्या कह रही हो? जाने से पहले सब कुछ तो कर गए पापा हम दोनों के लिए........" अनीता उदास स्वर में बोली। 

"हाँ छोड़ गए है न सास-ससुर के घर में उनके टुकड़ो पर पलने के लिए, सिर पर खुद की छत नहीं, दो जून के खाने के लिए सास-ससुर का मुँह तकना कितना, कुछ तो छोड़ गए है तेरे पापा हम दोनों के लिए।" निर्मला देवी चिढ़ते हुए बोली। 

"मम्मी इस टाइम प्लीज ये शुरू न करो। मैंने पापा जी पाँच किताबो का एक सैट ऑनलाइन ऑक्शन में निकाला था वो सब ८० हजार प्रत्येक के हिसाब से बिक गई है। किताब का ऑक्शन जीतने वाला किताबे लेने आ रहा है, जो पैसा मिलेगा उससे हम दोनों की कुछ दुश्वारियां कम ही होंगी, वो पाँचो किताबे यहीं रखी थी उनमे से एक अभी नहीं मिल रही है, बायर के आने से पहले किताब न मिली तो ये ऑक्शन जीरो माना जाएगा।" अनीता चिढ़ते हुए बोली। 

"अनीता ये तो तू बिलकुल सही कर रही है ये किताबो की जो भी रद्दी है उसे तत्काल बेच डाल, मुझे पैसो की परवाह नहीं है लेकिन इनके जाने से मुझे बहुत सकून मिलेगा, अब जितना जल्दी हो सके ये रद्दी बेच दाल।" निर्मला देवी शांत स्वर में बोली, "और सुन वो किताब चौबारे पर सूखने रखी है अभी थोड़ी देर उस किताब पर पानी गिर गया था, जा उठा ले।"

करीब एक घंटे बाद एन आर आई बुक कलेक्टर ने राहुल दीवान ने ४ लाख का चेक देकर मशहूर थिंकर ई एच वॉकर की लिखी पाँच किताबो का सैट खरीद लिया। 

"थैंक्स मिस अनीता, क्या आप के पास ऐसी ही कुछ और किताबे भी है?" राहुल दीवान उत्सुकता से बोला। 

"सर पापा ने अपने जीवन काल में अनगिनत किताबे खरीदी है, अब पापा तो है नहीं इसलिए हम उन किताबो को ऑक्शन या डायरेक्ट सेल के जरिए बेच रहे है; मैं अभी १० क्लास की स्टूडेंट हूँ और आमदनी का कोई जरिया न होए की वजह से पापा की इन किताबो को बेच कर ही गुजर-बसर हो रही है।" आरती उदास स्वर में बोली, "आइये आप पापा की किताबो को देख लीजिए, जो आपको अच्छी लगे ले लीजिएगा।"

पास के कमरे में लगी किताबो का ढेर देखकर राहुल दीवान हक्का-बक्का रह गया वो काँपते स्वर में बोला, "तुम्हारे पिता तुम्हारे लिए ऐसा खज़ाना छोड़ गए है जो तुम सोच भी नहीं सकती है, एक बुक कलेक्टर या बुक सेलर के तौर पर जहाँ तक मैं समझता हूँ इन किताबो की मार्किट वैल्यू करोड़ो में होगी, तुम चाहो तो किताबो को बेचकर यह काम खुद कर सकती हो या मुझसे कुछ पेशगी रकम लेकर मुझे यह काम करने दे सकती हो।"

राहुल दीवान की बात सुनकर निर्मला देवी कँपते स्वर में बोली, "आप मजाक कर रहे हो या सच में ये रद्दी किताबें इतनी कीमती है?"

"ये रद्दी है या खजाना है ये सोच विचार आप बाद में कीजिएगा, फ़िलहाल ये बताएं आपको मेरा ऑफर स्वीकार है या नहीं?"

"स्वीकार है........" निर्मला देवी अविश्वास भरे स्वर में बोली। 

"ठीक है मैडम मैं आपको यह चैक अभी दे देता हूँ और ये बुक्स लेने के लिए मैं एक सप्ताह बाद आऊंगा तब तक इस चैक का अमाउंट भी आपके अकाउंट में आ जाएगा। आप ये न समझे कि मैं आपको सिर्फ इतना ही दूँगा, मुझे इन बुक की सेल से जो भी प्रॉफिट मिलेगा उसमें आपका जो भी हिस्सा होगा मैं आपको पहुँचाता रहूँगा।" कहते हुए राहुल दीवान ने एक चैक भरकर निर्मला देवी के हाथ पर रख दिया। 

चैक पर लिखी रकम को देखकर आरती की आँखे फटी की फटी रह गई वो काँपते हाथो से चैक निर्मला देवी को देते हुए बोली, "मम्मी देखो पापा का उपहार, इससे हमारे सब सपने पूरे होंगे। हमारा अपना घर होगा, गाडी होगी.......सब कुछ होगा मम्मी।"


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन