पानी की बूंद का सफर
पानी की बूंद का सफर
एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में नन्हा बालक राहुल अपने माता-पिता के साथ रहता था। गाँव के पास एक सुंदर तालाब था, जहां से गाँव के लोग पीने का पानी लेते थे और खेतों में सिंचाई भी करते थे। एक दिन, राहुल ने अपनी दादी से पूछा, "दादी, ये पानी इतना खास क्यों है? क्या होगा अगर पानी खत्म हो गया?"
दादी मुस्कुराईं और राहुल को एक कहानी सुनाने लगीं।
"बहुत समय पहले, एक छोटे से गाँव में एक प्यारी सी पानी की बूंद रहती थी। उसका नाम था 'नीरा'। नीरा बहुत खुश थी, क्योंकि उसे लगता था कि वह हर किसी के जीवन का हिस्सा है। वह तालाब में तैरती, बादलों में उड़ती, और बारिश की बूंद बनकर धरती पर गिरती। जब-जब पेड़, जानवर और इंसान प्यासे होते, नीरा दौड़कर उनकी प्यास बुझाने चली जाती।
एक दिन, गाँव के लोग पानी का सही इस्तेमाल करना भूल गए। वे तालाब से बहुत सारा पानी निकालने लगे, बिना सोचे-समझे। खेतों में पानी को बेकार बहने दिया, घरों में नल खुला छोड़ दिया। धीरे-धीरे नीरा और उसके साथी बूंदों को लगा कि उनकी संख्या कम हो रही है। तालाब का पानी सूखने लगा, पेड़ मुरझाने लगे, और गाँव के जानवर प्यास से तड़पने लगे।
नीरा बहुत उदास हो गई। उसने बादलों से कहा, 'मैं क्या करूँ? अगर लोग इसी तरह पानी को बर्बाद करते रहे, तो हम सभी गायब हो जाएंगे और लोग प्यासे रह जाएंगे।'
बादल ने नीरा को एक सलाह दी, 'तुम लोगों को समझाओ कि जल कितना अनमोल है। उन्हें बताओ कि अगर पानी नहीं रहेगा, तो जीवन नहीं रहेगा।'
नीरा ने हिम्मत जुटाई और गाँव के बच्चों के पास गई। उसने उनसे कहा, 'अगर तुम पानी बचाओगे, तो मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगी। लेकिन अगर तुमने पानी को बेकार किया, तो एक दिन तुम्हें बहुत प्यास लगेगी और तब कोई भी बूंद तुम्हारी मदद नहीं कर पाएगी।'
बच्चों ने नीरा की बात समझी और अपने माता-पिता से कहा। धीरे-धीरे गाँव के लोग समझ गए कि पानी का सही उपयोग कैसे करना चाहिए। वे तालाब से उतना ही पानी निकालते जितना जरूरी होता, खेतों में पानी को ध्यान से इस्तेमाल करते और घरों में नल बंद रखना सीख गए।"
दादी ने कहानी खत्म की और कहा, "राहुल, पानी अनमोल है। 'जल ही जीवन है' का मतलब यही है कि पानी के बिना हम जी नहीं सकते। अगर हम पानी को व्यर्थ करेंगे, तो एक दिन हमें पानी की बहुत कमी महसूस होगी। इसलिए हमें पानी का हमेशा सही इस्तेमाल करना चाहिए।"
राहुल ने उत्साहित होकर कहा, "अब से मैं भी पानी की बूंदों को बचाऊंगा, ताकि नीरा और उसके साथी हमेशा हमारे साथ रहें।"
इस तरह राहुल ने सीखा कि पानी की हर बूंद कितनी कीमती होती है, और तभी से वह अपने दोस्तों को भी पानी बचाने के महत्व के बारे में बताने लगा।
