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Husan Ara

Children Stories


5.0  

Husan Ara

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नन्ही परी

नन्ही परी

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रानी परी अपनी छोटी परियों को अक्सर अपनी पृथ्वी पर जाने तथा इंसानों से दोस्ती के किस्से सुनाया करती थी। जिन्हे सुनकर एक नन्ही परी बहुत निराश होती और पूछती " अब कोई परियों से दोस्ती नहीं करना चाहता, न हमे मिलने बुलाता है। ना ही हमारी कहानियां अब सुनी सुनाई जाती हैं, ताकि बच्चे हमसे प्यार करें।

रानी परी उसे समझती कि "अब बच्चो के खेल बदल गए हैं टीवी और मोबाइल ने उनका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।"मगर सुंदर पहाड़ों के बीच रहने वाली एक सुंदर छोटी लड़की युक्ता अक्सर अपनी मां से परियों की कहानियां सुना करती थी । और किसी परी से मिलने के लिए सरोवर के पास जाकर प्रार्थना करती।

उसका बड़ा भाई उसके बचपने पर खूब हंसता। फिर भी युक्ता रोज़ अपनी मां से परियों के किस्से और कहानियां सुना करती।युक्ता का परिवार मेहनती था। वो अपनी सब्जियां और अनाज खुद उगाते , पशुओं को पालते और एक खुशहाल जीवन गुजारते।नन्ही परी अक्सर रात की चांदनी में सरोवर पर घूमने आती थी, जोकि युक्ता के घर से कुछ ही दूरी पर था।जब नन्ही परी ने युक्ता को परियों की बाते करते सुना तो उसने यह बात परी रानी को बताई।

मगर रानी परी ने उसे समझाया "अब मानव पहले से काफी लालची और मतलबी हो गया है। इसलिए किसी से दोस्ती करने की कोई आवश्यकता नहीं""।

 मगर फिर भी नन्ही परी कभी तितली बनकर युक्ता के आसपास घूमती , कभी चिड़िया का रूप बदलकर पेड़ पर बैठकर उसे खेलते हुए देखती रहती।

एक दिन भागते समय युक्ता को जब गहरी चोट लग गई तो नन्ही परी खुद को रोक नहीं पाई और अपने असली रूप में युक्ता के सामने पहुंच गई। उसने उस छोटी बच्ची को चुप कराकर, घाव पर मरहम लगाया।


युक्ता एकटक उसके छोटे परों को देखती रही और चमकते सुनहरे बाल मानो उसे अपने वश में ले रहे थे। 

"क्या तुम अब ठीक हो? " एक सुरीली आवाज ने युक्ता को झिंझोड़ा।

युक्ता ने सामने देखा और चिल्लाई" मां"सामने युक्ता के भाई और माता पिता को देखकर नन्ही परी डर गई । और उड़कर वापिस अपने घर पहुंच गई।


अब युक्ता रोज़ खेलते समय उस नन्ही परी को ढूंढती रहती और उससे दोबारा मिलने की ज़िद करती रहती।यह देखकर वह नन्ही परी रोज़ शाम के समय युक्ता से मिलने आने लगी। वो दोनो आपस में बातें करती कभी भागतीं , कभी खेलतीं।एक दिन जब परी के इंतजार में युक्ता बैठी हुई थी तो उसके भाई ने आकर युक्ता को बताया कि आज जब वह सब्जियां बेचने शहर गया था तो कुछ खेल खिलौने लेकर आया था । जोकि उसने मां की अलमारी में रखे हुए हैं।यह सुनकर युक्ता खुशी से उछलकर घर की ओर चली गई।

तभी नन्ही परी वहां पहुंच गई और युक्ता को ढूंढने लगी। मगर ताक लगाए बैठा उसका भाई एक बड़ा जाल लेकर वहां पहुंच गया और नन्ही परी को कैद कर लिया।

"जल्दी मुझे इस मटके में सोना भरकर दो" आदेश के स्वर में युक्ता का भाई बोल पड़ा।

"लेकिन मैं एक छोटी परी हूं मुझे ऐसा कोई जादू नहीं आता" कहकर वह परी रोने लगी।

"कोई बात नही जब मेरी कैद से कोई बड़ी परी तुम्हे छुड़ाने आएगी तब उससे सोना लूंगा तब तक तुम मेरी कैद में रहोगी।" युक्ता का भाई उसे वहां से उठाकर ले गया।

रात के समय जब युक्ता का भाई पानी भरने बाहर जाने लगा तब युक्ता दौड़ी हुई उसके पीछे आई मगर घर के एक छोटे से कमरे के कोने में कुछ चमकता हुआ देखकर ठिठक गई।जब भाई पानी भरकर लौटा तो उसने देखा घर बिल्कल शांत था । उसने सब घरवालों को आवाज दी मगर किसी की कोई आवाज उसे सुनाई न दी तो वह डरकर उस छोटे कमरे की ओर भागा जहां उसने नन्ही परी को बंद करके रखा था।

अचानक उसके पैरो को किसी चीज़ से बांध दिया गया और एक बहुत बड़े आकार की परी उसको दिखाई दी। उस परी के हाथ में वही मटका था जोकि उसने नन्ही परी को दिया था।

वह खतरनाक सी दिखने वाली परी बोल पड़ी " ये मटका भरकर सोना ले आना और अपनी बहन और माता पिता को ले जाना"।

लड़का गिड़गिड़ाने लगा और अपनी गलती की क्षमा मांगने लगा।मगर वह परी उसे उसी हालत में छोड़कर बाहर जाने लगी । लड़का रोता रहा मगर वह नही रुकी।

अकेले में बैठा हुआ लड़का सोचता रहा कि आज अपने लालच के कारण उसने कितने सुंदर जीवन को बर्बाद कर लिया ।तभी उसे कमरे के बाहर कुछ साए दिखाई दिए जिनसे वह बहुत घबरा गया। वो साए धीरे धीरे उसकी ओर बढ़े । 

"अरे ये तो मेरे माता पिता हैं " वह खुशी से चिल्लाया।तभी युक्ता और वह खतरनाक दिखने वाली परी भी कमरे में आ गए।लड़का उसे देखकर फिर से रोने लगा और वादा करने लगा कि आज के बाद कभी ऐसा लालच नहीं करेगा।यह सुनकर वह परी अपने असली रूप में आकर नन्ही परी में बदल गई।

"इसी उम्मीद के साथ और युक्ता के प्यार और लगाव के कारण मैं तुम्हे माफ करती हूं। मगर आज के बाद शायद कभी किसी पर विश्वास नहीं करूंगी।"

यह कहकर वह नन्ही परी हमेशा के लिए परीलोक वापिस चली गई।



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