Dr Jogender Singh(jogi)

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4.2  

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मीठी गोलियां

मीठी गोलियां

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औसत से बड़े कान, कान पर उगे काले/सफ़ेद बाल। चौड़ा माथा, जिस पर तीन पूरी और दो आधी लकीरें बाएँ से दाएँ खींची हुई। या शायद दाएँ से बाएँ ? चेहरा इस उम्र में भी सुर्ख लाल। खिचड़ी मूँछें। आंखों के नीचे मोटी मोटी झुर्रियां, फिर भी आंखे बड़ी बड़ी दिखती। पलकों के एक आध बाल सफ़ेद। कद पांच फुट सात या आठ इंच। गठीला बदन, कभी बहुत मजबूत होगा, यकीनन। नज़र अभी भी तेज़। बीड़ी/सिगरेट पीने का अंदाज़ एकदम निराला। दो उंगलियों में सिगरेट फंसा कर मुट्ठी बांध धीरे से कश लगाना। अनामिका और अंगूठे को रगड़ राख झाड़ना। कुर्ता पायजामा और सदरी। सिर पर गोल टोपी। जय प्रताप सिंह पूरा नाम वैसे दोस्तों के लिए प्रताप और उनकी मां के लिए प्रतापू। हम लोगो के दादा। पैरों में हर वक़्त जूते। कुर्ते की एक जेब में मीठी गोलियां, दूसरी जेब में लाइटर और बीड़ी या सिगरेट।

देखते ही दौड़ कर पैर छूना, जो सबसे पहले पैर छूता वो गोली दो गोली एक्स्ट्रा पा जाता। प्रताप दादा के पिता जी गांव के प्रधान रहे लगातार दो बार। इसलिए लोग उनको भी प्रधान बोलते, हालांकि वो प्रधान कभी नहीं बने। प्रधान सुनते ही कुप्पा हो जाते दादा।

चालीस साल की उम्र के बाद उनकी सरकारी नौकरी लगी, पंप ऑपरेटर की, क्योंकि पंप हाउस और स्टोरेज टैंक दोनों उनकी ज़मीन पर बनाए गए।

मैने एक साल बाद उनको देखा, पैर छुए। यह लो कंपट, फिर झिझक गए, हाथ वापिस खींच लिया, तू तो बड़ा आदमी हो गया अब , यह मीठी गोली क्यों खायेगा? अरे लाओ दो, चीटिंग मत करो, एक तो इतने दिनों बाद मिले हैं, उस पर गोली भी नहीं दे रहे। यह ले, दो ले तू। तू नहीं बदला, बिल्कुल भी नहीं । रुंधे गले से दादा बोले। मैने एक बार फिर उनके पैर छू लिए।



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