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Kalpesh Patel

Children Stories Classics Inspirational

4.7  

Kalpesh Patel

Children Stories Classics Inspirational

मौन का साया

मौन का साया

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मौन और सन्नाटा, और उड़ाका साया.


गाँव बिजौलीपुर में एक अनोखी जोड़ी थी—रामू और श्यामू। एक बोल नहीं सकता था, दूसरा सुन नहीं सकता था। मगर उनकी दोस्ती ऐसी थी जैसे आत्मा और शरीर। 

गाँव के बच्चे उनका मज़ाक उड़ाते थे—
*"देखो, गूंगा और बहरा मिलकर कौन-सी दुनिया बदलेंगे?"*  

मगर रामू और श्यामू सिर्फ मुस्कुराते, क्योंकि वे जानते थे कि उनकी दुनिया इन आवाज़ों और शोर से कहीं बड़ी थी।  


एक दिन गाँव में आफत आई।  
नदी के किनारे बने पुराने पुल के नीचे कुछ बच्चे खेलते-खेलते फँस गए। बादल गरजने लगे थे, और बारिश की पहली बूँदें धरती पर गिरने लगी थीं। पानी धीरे-धीरे बढ़ रहा था, और बच्चों की चीखें हवा में घुलने लगीं।  


गाँव में अफरा-तफरी मच गई। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए।  
तभी रामू और श्यामू आगे आए।  


रामू ने इशारों से समझाया कि वह रस्सी और लकड़ी लेकर नीचे जाएगा। श्यामू उसकी आँखों में देखता रहा—हर इशारा समझने की कोशिश करता। फिर वह बिना एक पल गंवाए दौड़कर रस्सी और बाँस ले आया।  


बारिश तेज़ हो गई थी। गाँव वाले हताश थे।  

श्यामू ऊपर खड़ा था, मिट्टी में पैर गाड़कर रस्सी पकड़ रहा था। रामू नीचे उतर रहा था।  

पानी बढ़ रहा था। रामू की उंगलियाँ ठंडी हो चुकी थीं, मगर उसने हिम्मत नहीं हारी।  

पहला बच्चा रस्सी से बाँधकर ऊपर भेजा गया। गाँव वालों की साँसें थमी हुई थीं। जैसे ही बच्चा ऊपर पहुँचा, एक औरत की आँखों से आँसू बह निकले।  


रामू ने दूसरा बच्चा पकड़ा। पानी अब उसकी कमर तक आ चुका था। श्यामू ने रस्सी जोर से खींची। बच्चा ऊपर आ गया।  


अंतिम बच्चे को निकालते समय, रामू का पैर फिसल गया। उसका हाथ बाँस से छूटने लगा।  

श्यामू ने देखा—उसका दोस्त अब ख़तरे में था।  गाँव वाले चिल्ला उठे।  


श्यामू ने बिना सोचे रस्सी को और कसकर पकड़ा। उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी और रामू को ऊपर खींचने में जुट गया।  
बारिश इतनी तेज़ हो चुकी थी कि कुछ भी साफ़ नहीं दिख रहा था। मगर एक पल के संघर्ष के बाद, रामू ऊपर आ गया।  


गाँव में एक पल के लिए पूरा मौन छा गया। फिर, किसी ने ज़ोर से ताली बजाई।  
धीरे-धीरे पूरा गाँव तालियों से गूंज उठा।  


प्रधान जी ने कहा—  
*"आज रामू और श्यामू ने हमें सिखा दिया कि सुनना और बोलना ज़रूरी नहीं, ज़रूरी होता है दिल से समझना और इंसानियत निभाना।"*  


गाँव वालों की आँखें नम थीं, और रामू-श्यामू के चेहरे पर मुस्कान थी—वो मुस्कान, जो हर आवाज़ से ऊँची थी।  

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**सीख:**  
*"कभी-कभी सबसे ज़्यादा सुनने वाले वही होते हैं जो सुन नहीं सकते, और सबसे गहरे बोल वही जाते हैं जो बोल नहीं सकते।"*  
"मौन और सन्नाटा भी कभी-कभी सबसे बड़ी कहानी कहते हैं।"*  

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