Shakuntla Agarwal

Others


4.3  

Shakuntla Agarwal

Others


ख़ौफ़

ख़ौफ़

1 min 147 1 min 147

घर की घंटी बजते ही, गोयल साहब बाहर की तरफ़ दौड़े, जैसे वो तैयार बैठे थे कि कोई अनर्थ ना हो जाये,

उन्होंने मेज़ पर जो पैसे रखे थे, वो हाथ में लिये और बाहर की तरफ़ दौड़े।

अरे! मुझे पता था कि तुम ही होगी, बाई जी, दरवाज़े को हाथ मत लगाना,

सुना है! कोरोना का वायरस मैटल पर बारह घंटे रहता है। मैंने दरवाज़े और कुण्डियों को अभी - अभी सैनिटायेज़ किया है।

मैं नहीं चाहता कि तुम उनको अभी छुओ। गेट के ऊपर से ही बाईजी को, थैले में जो पैसे रखे हुए थे, देकर अलविदा कह दिया, कि आप इक्कीस दिन तो बिल्कुल मत आना, बाद की बाद में देखेंगे।


   


Rate this content
Log in