जन्नत
जन्नत
स्कूल का पहला दिन हर किसी को याद होता है ,
"स्कूल का पहला दिन जिंदगी भर याद रहने वाला एकमात्र दिन होता है जो खुद को समझदार बताने के लिए काफी होता है।"
"12 साल तक तक सोचते थे कि कब आज़ादी मिलेगी इस जेल से लेकिन जिंदगी अब समझा रही उस जन्नत को हम क्यों छोड़ चुके है।"
"मुझे याद है जब मैं पहले दिन स्कूल गया था, बड़ी जल्दी थी उस दिन जब मैं स्कूल जाने के लिए उतावला था।"
मेरी मम्मी ने मुझे नहलाया और अच्छे कपड़े पहनाए। जूते लगाए फिर बालों को संवारा। एक छोटी सी बैग में एक स्लेट और चॉक़ दी और बैग पीछे लगा दी। मेरे बड़े भैया अमर के साथ मैं स्कूल जा रहा हूं। रास्ते में कुछ बसें चलती देख रहा हूं कि अचानक भैया कान खींचते है कि आगे देखकर चलना चाहिए।
मेरे विद्यालय का गेट खुलने के लिए हम इंतजार कर रहे हैं। इतने में गेट खुल गया और अंदर आ गए। मैं अपने भैया के साथ ही हूं , क्योंकि पहले दिन मैं किसी को जानता नहीं हूं। बेल बजी है और प्रार्थना होने वाली है। सभी बच्चे आ रहे हैं और कुछ दौड़ रहे हैं। एक गुरुजी ने आवाज़ लगाई कि कतारबद्ध होकर खड़े रहे प्रार्थना होने वाली है। सभी बच्चे कतार से खड़े हो गए और मैं लंबाई में कम होने से आगे खड़ा किया गया, मुझे डर लगा। कि कहीं कोई डांट न लगा दे।
प्रार्थना पूरी हुई और हमें दो दो केले बांटे गए, सभी बच्चे खुश होकर खा रहे हैं और मैं भी खा रहा हूं। हम सभी बच्चे कक्षा में बैठ गए, अब भैया अपनी कक्षा में जा चुके थे। गुरुजी आए और मुझे खड़ा किया और कहा - " बेटा क्या नाम है आपका " पहली बार अपने लिए प्रश्न सुनकर मैं रोने लगा।
तो गुरुजी ने मुझे कुछ चॉकलेट दी और कहा - "बेटा नाम बताओ और चॉकलेट्स दूँगा।"
मैनें डरते हुए अपना नाम बताया और दो चॉकलेट और अपने नाम की।
फिर गुरुजी ने मेरी स्लेट पर "क" लिखा और कहा बेटा इसको बार बार बनाओ आपको कुछ और चॉकलेट मिलेंगे। मेरा डर कम होने लगा और मैं भी हँसने लगा। फिर बेल बजी और दूसरे गुरुजी आए। छुट्टी होने तक पांच बार अलग अलग गुरुजी आए और स्नेह से पढ़ाया। फिर छुट्टी हुई और मैं उत्साह से भैया के साथ घर आ गया । मम्मी ने लाड प्यार से खाना खिलाया और मैं दिन भर की कहानी सुनाने के बाद खेलने लग गया। बहुत खूबसूरत दिन था काश कभी वापिस आ जाए।
