जन्मदिन मुबारक हो नाना मेरे !
जन्मदिन मुबारक हो नाना मेरे !
ईशा संजय जी की एकलौती बेटी है। बड़े ही नाजो से पाला है उन्होंने और उनकी पत्नी प्रियंका ने। पर जब ईशा छोटी सी थी, तब संजय जी को काम के सिलसिले में 10 साल के लिए विदेश भेज दिया गया। कंपनी में ऊँचे ओहदे पर होने के कारण ना चाहते हुए भी उन्हें अपने परिवार को छोड़ कर जाना पड़ा। अपनी बेटी के साथ जो 10 साल उनके लिए बेशकीमती थे, उन्हें गँवाना पड़ा। उन्हें अपनी ज़िन्दगी में इस बात का हमेशा मलाल रहा कि उन्होंने अपने पेशे में खूब नाम कमाया, खूब शोहरत कमाई। एक अच्छी खासी इज़्ज़त है उनकी समाज में ,पर अपनी बेटी के साथ बचपन में रहने का सौभाग्य शायद वो खो बैठे। जब वो विदेश से वापिस आये तो ईशा स्कूल जाने लगी थी। वो भी अपने काम में व्यस्त रहते ,शाम को थोड़ी देर खेलने के लिए समय जरूर निकाल लेते थे। समय बढ़ता गया, ईशा अपनी इंजीनियरिंग करने विदेश चली गयी, और जब वापिस आयी तो उसकी शादी हो गयी। माँ बाप फिर अकेले से हो गए। प्रियंका के पास तो ईशा की काफी यादें थी, पर संजय शायद उसमे भी पिछड़ गया था। अब ऑफ़िस से भी रिटायर होने के बाद संजय के पास काफी समय था। वह सब कुछ करना चाहता था, जो उसने ज़िन्दगी में नहीं किया था। अब भगवान ने शायद उसकी बात सुन भी ली थी ,आज संजय का जन्मदिन था और उन्हें खबर मिली कि ईशा के घर एक नहीं परी ने जन्म लिया है। संजय की आँखों मे ख़ुशी की बरसात होने लगी, मानो रब ने उन्हें सब कुछ दे दिया। जो समय वो अपनी बेटी ईशा के साथ नहीं बिता सके, वो कीमती समय वो अपनी बेटी की बेटी के साथ बिताएंगे। ईशा की बेटी तारिणी अब सबकी आँखों का तारा है। उनके जीवन का हर दिन अब बसंती हो गया, अब हर जन्म दिन पर वो अपने नाना को " हैप्पी बर्थडे नाना " बोलती है और उसके नाना "हैप्पी बर्थडे तारिणी " बोलते है। सच में कुछ पल जो हमसे छूट जाते है ,भगवान फिर से मौका देते है उन्हें जीने का। आइये अपने आस पास से वो कीमती पल ढूंढ निकाले।
