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Man Singh Negi

Children Stories Children

4  

Man Singh Negi

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हिजाब

हिजाब

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पुष्पा आज के दिन की शुरुवात हिंदू लड़कियों के हिजाब के साथ। 

पुष्पा तेजी से मुस्कुरा कर बोली क्या आप जानते हो। आप ने क्या कह दिया है। आप क्या कह रहे हो। क्या आप आज जोश में हो ना। 

मान ने कहा हां आपने सही सुना है। आज के दिन की शुरुवात हिंदू लड़कियों के हिजाब के साथ। 

पुष्पा ने फिर चिल्ला कर पूछा हिजाब और हिंदू लड़कियों का क्या लेना देना है। 

मान ने कहा क्या आपको याद है वह मधुर गीत चेहरा छुपा लिया है किसी ने हिजाब में। वरना लग जाती आग तुम्हारे शबाब में। 

यदि इस मधुर गीत को पूरा सुने तो आज वह गीत हिंदू लड़कियों के परिवर्तन पर सही ठहरता है। 

पुष्पा ने कहा हां सुना है। मान ने कहा तो आपने उस गीत से क्या सीखा।

पुष्पा ने कहा उस गीत से मैंने क्या सीखा यह छोड़ीए।  

इतना मैं जानती हु मुसलमान औरतों को हिजाब पहनना लाजमी है। 

मान ने कहा आप बिल्कुल सही कह रही हो। हिजाब वास्तव में मुसलमान औरतों के पहनावे में एक है। 

परंतु हम मुसलमान औरतों के पहनावे हिजाब के बारे में आपको नही बताना चाहते। 

पुष्पा ने पूछा फिर क्या हिंदू लड़कियों के हिजाब के बारे में बताना चाहते हो। 

मान ने कहा यह तुम्हे कैसे मालुम पडा। मैं आपको हिंदू लड़कियों के हिजाब के बारे में जानकारी देने जा रहा हु। 

पुष्पा ने कहा आपने ही कहा था आज के दिन की शुरुआत हिंदू लड़कियों के हिजाब के साथ।

मान ने मुस्कुराते हुए कहा आप सही कह रही हो। आज आपको और तमाम हिंदू लड़कियों को यह समझाने का प्रयास कर रहा हूं। 

जिस हिजाब में आप अपना चेहरा छुपा रहे हो। एक दिन वास्तव में आपको अपने आप से अड़ोस पड़ोस से चेहरा छुपाना पड़ेगा।

क्योंकि चेहरे पर बालों को हिजाब से ढक कर अपने आप को छुपाया जा सकता है। 

परंतु यह कभी मत भूलना हिजाब आपके लिए नहीं बना था। आपने इसे इसलिए अपना लिया। कोई आपका अपना आपको मोटरसाइकिल में बस में कार में स्कूटर में स्कूटी में पहचान ना सके।

पुष्पा हम तमाम उन हिंदू लड़कियों को यह बता देना चाहते हैं। जो हिजाब पहनकर बड़े चाव से इधर से उधर सैर सपाटा कर रही हैं। जो हिजाब पहनकर बड़े चाव से मौज मस्ती कर रही हैं। 

एक दिन यही सैर सपाटा एक दिन यही मौज मस्ती आपको एहसास दिलाएगी। 

आपने जो रास्ता पकड़ लिया है। वह दलदल की तरफ जाता है। एक ऐसा दलदल जो आपको अंदर ही अंदर इस प्रकार खींचता रहेगा। जब तक आप कि सांसे उखड़ ना जाए। 

जिस दिन आपकी सांसे थम जाएंगी। 

उस दिन उस मोटरसाइकिल पर उस कार में उस बस में कोई दूसरी हिंदू लड़की हिजाब पहनकर अपने आप पर इतराते हुए स्वयं से इस प्रकार मिट जाएगी। 

जैसे शम्मा पर परवाने परवान हो जाते है।

हिजाब भारत में मुसलमान औरतों का गहना है।

परंतु मुसलमान औरतों का यह गहना कब हिंदू महिलाओं का पसंदीदा आभूषण बन गया। 

यह उनको पता नही चला ना ही उनके माता-पिता को पता चला। ना उनके अड़ोस पड़ोस को पता चला।

कब कैसे क्यों हिजाब हिंदू लड़कियों का सबसे पसंदीदा आभूषण बन गया।

कहते हैं एक शख्स जीवन में ऐसा होना चाहिए। जो हमारी परवाह करता हो। 

हमारे अनुभव के अनुसार अड़ोस पड़ोस वह शख्स होते हैं। जो हमारी सबसे ज्यादा देखभाल करते हैं। 

परंतु न जाने कैसे हमारे पड़ोसी भी इस बार हमारी देखभाल करने में असमर्थ हो गए। 

क्योंकि इस बार उनकी परियां भी हिजाब के पहनावे से अछूती नहीं रही।

शायद यही सबसे बड़ी वजह थी। किसी का भी ध्यान इस तरफ नहीं गया। 

हिंदू लड़कियों की चुन्नी ने कब हिजाब का रूप अपना लिया। 

या दूसरे शब्दों में कहें उनकी ही बेटियों ने चुन्नी को कब हिजाब बना लिया। यह बात पड़ोसियों को भी पता नहीं चल सकी।

पुष्पा हिंदू लड़कियां अपनी ही जान की दुश्मन बनी हुई है।

पुष्पा हिंदू लड़कियां आज कहने से नहीं चूक रही। आ बैल मुझे मार।

पुष्पा ने पूछा वह कैसे। मान ने कहा पुष्पा यदि हिंदू लड़कियां चुन्नी को हिजाब के रूप में ना बदलें। 

तो कोई न कोई उनके दिनचर्या के सफर में उन्हें पहचान लेगा। 

यह हमारी शर्मा जी की बेटी है। यह हमारी नेगी जी की बेटी है। यह हमारी वर्मा जी की बेटी है। यह हमारी कश्यप जी की बेटी है। यह हमारी चतुर्वेदी जी की लड़की है।

परंतु हमारी ही हिंदू बेटियां जिन्हें पापा की परी कहते हैं। 

वह ही अपने आप को धोखा देती है। अपने आप को धोखा देते हुए अपना जीवन गवा देती है। 

पुष्पा ने फिर पूछा वह कैसे। मान ने कहा चुन्नी हिंदुओं महिलाओं के लिए सम्मान है। पुष्पा चुन्नी सिर्फ परिधान नहीं है। 

पुष्पा चुन्नी में मां का प्यार बसता है। मां-बाप का सम्मान रहता है। वह चुन्नी ना होकर घर परिवार की शान है। 

पुष्पा चुन्नी को महज चुन्नी कह देना। भारतीय संस्कृति और परंपरा के लिए आसान नहीं है। 

चुन्नी को चुन्नी समझने में बहुत ध्यान देना पड़ता है। जिस चुन्नी को पहनकर आप घर से निकली हो। उसमें मां का आशीर्वाद छिपा है। पिता की परवाह छुपी है। पिता जो निष्ठुर कठोर समझा जाता है। उस पिता के अरमान छुपे हुए हैं। 

उसके पश्चात भी हिंदू लड़कियां घर से चुन्नी पहनकर तो निकलती है। 

परंतु घर की कुछ दूरी के पश्चात वह चुन्नी चुन्नी ना रहकर हिजाब में इसलिए बदल जाती है। कोई उन्हें पहचान ना सके। 

हम हिंदू लड़कियों से अनुरोध करते हैं। हम पापा की परियों से अनुरोध करते हैं। जिस चुन्नी में माता-पिता का सम्मान बसता है। उसे हिजब बना कर अपना और माता-पिता का जीवन बर्बाद ना करें।

जिस चुन्नी में माता-पिता का प्यार बसा हुआ है। उसे हिजब बना कर उनके प्यार का विश्वास ना तोड़े।

चुन्नी हिंदू लड़कियों के लिए गहना है। सुन्नी हिंदू लड़कियों के लिए मान सम्मान है। चुन्नी हिंदू लड़कियों के लिए बुरी नजरों से बचने का कवच है। 

चुन्नी हिंदू लड़कियों के लिए माता पिता का विश्वास है। चुन्नी हिंदू लड़कियों के लिए माता-पिता की का सम्मान है। 

हिंदू लड़कियों से अनुरोध है। इसे हिजाब के रूप में परिवर्तित ना करें।

चलते चलते एक प्रश्न देश के तमाम माता-पिता से पूछना चाहता हूं। 

क्या उनकी बेटियां घर से चुन्नी पहनकर निकलती है।

क्या उनकी बेटियां शाम को चुन्नी पहनकर ही वापस आती है।

क्या उनकी बेटियां चुन्नी को घर से बाहर निकलने पर हिजाब बना लेती है।

क्या किसी माता-पिता की बेटी ऐसी भी है। जो चुन्नी को घर से हिसाब बना कर चलती है। घर में शाम को हिजाब के रूप में ही प्रवेश करती हैं।

हम किसी का भी दिल दुखाना नहीं चाहते। 

इस कहानी का मकसद किसी के दिल को दुखाना नहीं है। 

इस कहानी का मकसद हिंदू लड़कियों को जागरूक करना है। 

चुन्नी में माता-पिता का प्यार और आशीर्वाद छिपा है।

चुन्नी हिंदू रीति रिवाज भारतीय परंपरा और संस्कृति के अनुसार एक परिवार का मान सम्मान है। 

इसे हिजब में परिवर्तित ना करें।


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