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Pawan Gupta

Children Stories Drama


4.7  

Pawan Gupta

Children Stories Drama


गाँधी जी के तीन बन्दर

गाँधी जी के तीन बन्दर

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"दादा जी दादा जी कहाँ हैं आप" ...चिल्लाता हुआ टप्पू अपने घर पंहुचा !

 "टप्पू बेटा आराम से बेटा... बता क्या बात है , क्यों इस तरह चिल्ला रहा है !"

 "दादा जी दादा जी मुझे आपसे कुछ पूछना है !

 दादा जी टप्पू को रोकते हुए " हां ..हां टप्पू बेटा पूछ लेना पर पहले हाथ मुँह धो के खाना खा ले फिर बैठ कर बात करते हैं !"

 टप्पू - "ओके दादाजी ,मैं तुरंत खा कर आता हूँ !मम्मी.. जल्दी खाना दो ..

 टप्पू की माँ - "अरे टप्पू बेटा एक मिनट बेटा खाना लगा रही हू , तू हाथ मुँह तो धो ले !"

 माँ खाना परोसते हुए " टप्पू... टप्पू ... कहाँ गया बेटा !" अरे ... टीवी देखने लगा ,टीवी बंद करके खाना खा ले बेटा !"

 टप्पू -" मम्मी टीवी चलने दो न मैं टीवी देखते देखते खाना खा लूंगा !"

 टप्पू टीवी देखते देखते खाना खाने लगा , अचानक उसे याद आया कि दादाजी से उसे कुछ पूछना है !उसने खाना खत्म करके तुरंत टीवी बंद किया ,और दादाजी के रूम में चला गया !दादा जी कोई भजन की किताब पढ़ रहे थे !

टप्पू - "दादा जी दादा जी मेरे सवाल का जबाब तो दो न !"

दादा जी - "बोल टप्पू"( अपनी भजन की किताब बंद करते हुए ) 

टप्पू - "दादा जी आज हमारे हिस्ट्री के टीचर ने गाँधी जी का पाठ पढ़ाया !उन्होंने बताया कि गाँधी जी भी हमारे गुजरात के पोरबंदर के रहने वाले थे !"  दादा जी -" हां टप्पू हां"

 टप्पू -" हमें होमवर्क मिला है कि कल हम सबको गाँधी जी के जीवन से जुड़ीi कुछ बातें बतानी है , दादा जी प्लीज आप मेरी मदद कीजिये न गाँधी जी की कुछ बाते बताइये न !"

दादा जी - "अच्छा टप्पू , तुझे पता है , गाँधी जी का पूरा नाम मोहन दस करम चंद गाँधी था , उनका एक आश्रम सावरमती में था ,ये जगह भी गुजरात में ही है , गाँधी जी की पत्नी का नाम कस्तूरबा गाँधी था ,उनके 4 बेटे  थे, उन्होंने वकालत की पढाई की थी ! एक बार जब वो ट्रैन से वापस आ रहे थे तो अंग्रेजो ने उन्हें उनके सामन के साथ ट्रैन से बाहर फिकवा दिया ! तभी गांधी जी ने शपथ लिया कि जिस तरह इन अंग्रेजो ने मुझे ट्रैन से बाहर किया है , एक दिन मैं भी इनको देश से बाहर करूँगा !"

टप्पू - "ओ.. वाओ.. दादा जी और बताइये न !"

दादा जी - "हां ..हां ..टप्पू तुझे पता है , गाँधी जी ने कई मंत्र दिए है , गाँधी जी का पहला मंत्र था , अहिंसा परमो धर्म ,उन्होंने कभी भी हिंसा को नहीं अपनाया ना कभी हिंसा का साथ दिया !अंग्रेजो को भागने में भी असहयोग आंदोलन , नमक आंदोलन , खिलाफत आंदोलन आदि बहुत से आंदोलन किये पर सारे ही आंदोलन अहिंसा के आधार पर ही किये !कभी किसी को नुकसान नहीं पहुचाये !एक गाना भी है गाँधी जी के अहिंसा के ऊपर ..

  

   दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढ़ाल

   साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल !


टप्पू - "दादा जी गाँधी जी के तीन बन्दर कौन थे ,सब यही कहते हैं कि गाँधी जी के तीन बन्दर ! इस कहावत का क्या मतलब है !"

दादा जी - "टप्पू गाँधी जी के तीन बन्दर ये एक कहावत है , वास्तव में वो तीन बन्दर नहीं वे गाँधी जी के तीन विचार हैं ,गाँधी जी ने लोगों के सामाजिक कल्याण के लिए तीन मूल मंत्र दिए थे !

 (1) बुरा मत देखो ( अर्थात हमें हर बुरी जगह से दूर रहना चाहिए )


 (२) बुरा मत सुनो ( अर्थात अगर कोई बुरी या गलत बात कहता है तो ध्यान मत दो )


 (3) बुरा मत कहो ( अर्थात हमें कभी भी गलत नहीं बोलना चाहिए )


इन्ही मंत्रो को गाँधी जी के तीन बंदरो के रूप में प्रदर्शित करते हैं !तुमने देखा होगा टप्पू कहीं पर भी तीन बंदरों की एक साथ बनी मूर्ति , तो उसमे भी पहले बन्दर ने अपनी कान बंद किये होंगे ,दूसरे ने आँखे और तीसरे ने अपनी मुँह !"

टप्पू - "ये गाँधी जी के मंत्र हमारे समाज पर कैसे प्रभाव डालते है !"

दादा जी - "टप्पू तुझे एक कहानी सुनाता हू ,ध्यान से सुन ....पुराने समय में एक राजा सर्वपल्ली हुआ करता था ! वो बहुत ही क्रूर था , एक बार की बात है उसके राज्य पर हमला हो गया ! और उस युद्ध में सब मारे गए ! वो वहां से भागकर एक साधु की कुटिया में पंहुचा ! राजा प्यास और भूख से ब्याकुल था , उसने साधु से पिने का पानी माँगा !पर साधु अपनी साधना में लीन था , तभी एक आस्मां में उड़ता हुआ चील चीख - चीख कर राजा से कहने लगा ! 

ये साधु ढोंगी है , ये तुम्हारा शत्रु है , ये बात सुनकर साधू राजा को अपना शत्रु लगने लगा !और राजा क्रोध में आकर उस साधु को अपशब्द बोलने लगा !

जब साधु की साधना टूटी तो ये सब सुन साधु को बहुत दुःख हुआ और उसने उस राजा को श्राप दे दिया , कि वो आजीवन बन्दर का रूप लेले !इस श्राप के बाद वो राजा साधु के पैरो में गिरकर बहुत गिड़गिड़ाया !महात्मा को उस राजा पर तरस आ गई !

महात्मा ने राजा से कहा -" हे राजन मेरा श्राप अचूक है , पर हां तुम मरने के बाद भी अपने ज्ञान और कर्मो से सदा अमर रहोगे !"ये सुनने के बाद राजा को सब याद हो आया कि किस तरह उसने अपनी आखो से सिर्फ गलत ही देखा था , जिसके कारण उसकी बुद्धि उससे गलत करवाती गई ,अपने शत्रुओ को देख उसकी बुद्धि उसे सभी को उसका शत्रु दिखने लगी !मतलब कि हम जो भी गलत या सही देखते हैं , उसका असर हमारे दिमाग पर होता है ,इसलिए हमेसा अच्छी चीजें देखनी चाहिए बुरी चीजों से दूर रहना चाहिए ! दूसरे उसने उड़ते चील की बात सुनी सही गलत को नहीं समझा और उस कारण मेरा क्रोध बढ़ा !मतलब हमें हमेशा अच्छी बाते ही सुन्नी चाहिए बुरी बातो पर ध्यान नहीं देना चाहिए !तीसरे मैंने ये सब होने के बाद मैंने अपने जुबान पर लागम नहीं लगाया !  जिसका परिणाम ये हुआ कि आज मैं बन्दर हू !मतलब हमें बिन सोचे समझे नहीं बोलना चाहिए ,हमारी बोली गई गलत बात सब कुछ बिगाड़ सकती है !


तब के बाद बन्दर बना राजा जब की किसी के गाँव में जाता तो अपने इशारो से लोगो को ये ज्ञान देता रहता कि 

कभी गलत मत देखो , गलत चीजे देखने से दिमाग पर गलत असर होता है !

कभी गलत मत सुनो , गलत सुनी सुनाई बाते पुरे समाज को बर्बाद कर सकती है !

कभी गलत मत बोलो , गलत बोल कर इंसान अपना ही शर्वनाश कर लेता है ! 

अतः वही बन्दर अपने ज्ञान प्रसार से आज भी गाँधी जी के बन्दर के नाम से अमर है !

टप्पू - "दादा जी ये कहानी सच है क्या ..."

दादा जी - हां ..हां .. हां .. हंसते हुए ! नहीं टप्पू ये सब कहानियां काल्पनिक होती हैं ,बस ज्ञान का प्रसार करने के लिए ऐसी शिक्षा प्रद कहानियां बनाई जाती हैं !

टप्पू - "दादा जी मुझे भी ये कहानी बहुत पसंद आई है , मैं भी इन तीन मूल मंत्रो पर अमल करूँगा !और स्कूल के सभी फ्रेंड्स को भी बताऊंगा ,कि उनकी जिंदगी में भी परेशानिया कम से कम आये !वो भी एक अच्छे भारतीय नागरिक बन सके !थैंक यू दादा जी .....'   


     

   

       

          


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