दोस्ती और धोखा
दोस्ती और धोखा
राजेश और पुनीत अच्छे दोस्त तो थे ही पर एक दूसरे के लिए कुछ भी कर गुजरने की चाह भी रखते थे। दोनों ही मध्यम वर्गीय परिवार के सदस्य थे ।राजेश सतना से था और पुनीत ग्वालियर का रहने वाला था।
दोनों भोपाल में में एक प्रतिष्ठित कॉलेज मैनिट में इंजीनियरिंग करने के लिए आए थे। दोनों का सिलेक्शन कॉम्पिटेटिव एक्जाम के माध्यम से हुआ था।
इंजीनियरिंग के प्रथम वर्ष में वह दोनों लगातार पूरी मेहनत करते रहे और रैगिंग के भय के बावजूद भी उन्होंने अच्छे अंक प्राप्त किए।
दूसरे साल में उन दोनों ने हॉस्टल छोड़ दिया और दोनों अलग-अलग कमरे लेकर शहर में किराए से रहने लगे।
एक दिन राजेश कॉलेज नहीं गया और दोपहर को वह किसी आवश्यक कार्य से सिटी बस से न्यू मार्केट जा रहा था ।इस बस में रंभा भी बैठी हुई थी। नाम के अनुरूप रंभा बहुत सुंदर और गौर वर्ण की सजीली दुबली लड़की थी। उसके चेहरे पर एक कमनिय मुस्कान हमेशा सजी रहती थी । पोनीटेल वाली चोटी और नाभीदर्शना और और उसके कामिनीय उभारों को संधिस्थल तक थोड़ा सा दिखाता हुआ सफेद प्रिंटेड टॉप तथा टाइट जींस उसके शरीर के अंग प्रत्यंग को स्पष्ट परिभाषित कर रही थी।
पतली कमर और चेहरे पर पढ़ते डिंपल उसे इतना आकर्षक रूप प्रदान कर रहे थे कि राजेश की निगाहें उस पर से हट ही नहीं रही थी।
रास्ते में मैं सिटी बस का टायर पंचर हो गया और अब सारी सवारियों के सामने किसी दूसरे वाहन से जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था।
रंभा ने एक ऑटो को हाथ दिया ।ऑटो रुक गया और रंभा ने उससे पूछा
"भैया न्यू मार्केट तक जाने का क्या पैसा लोगे"
तपती दोपहरी का मौका देखते हुए ऑटो चालक ने ₹120 मांगे। इतने अधिक पैसे देना मध्यम वर्गीय परिवार की रंभा के लिए संभव नहीं था। इस कारण वह मन मार कर एक तरफ खड़ी हो गई। राजेश ने अपने लिए एक दूसरा ऑटो कर लिया और रंभा से कहा
" मैं न्यू मार्केट ही जा रहा हूं !यदि आपको कोई आपत्ति न हो ,तो आप मेरे साथ इस ऑटो में चल सकती हैं।"
रंभा को यह प्रस्ताव बहुत अच्छा लगा! हालांकि उसके मन में किसी अकेले लड़के के साथ जाने में एक संकोच तो अनुभव हो ही रहा था ।पर तपती दोपहरी और सीधे-साधे आकर्षक व्यक्तित्व वाले राजेश को देखकर अंततः उसने राजेश के साथ जाने का मन बना ही लिया ।ऑटो में ही राजेश और रंभा की एक दूसरे से पहली पहचान हुई ।राजेश ने कहा।
" मैं राजेश सक्सेना! मैं यहां रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज में आईटी द्वितीय वर्ष का छात्र हूं । और मैं एक मध्यम वर्ग की परिवार से हूं।
रंभा ने अपना परिचय दिया।
"मैं रंभा श्रीवास्तव ।मैं बी काम द्वितीय वर्ष की छात्र हूं और मैं नूतन कॉलेज में पढ़ती हूं।
यह परिचय यहीं समाप्त हो जाता ।पर हुआ यू की एक दिन रंभा अपने कालेज से लौट रही थी की अचानक ही एक सड़क छाप मजनू ने उसे अत्यंत रूपसी रंभा को अकेला देखकर उस पर भद्दे कमेंट करना चालू कर दिया।
सुनसान रास्ते पर चलते हुए रंभा ने बहुत हिम्मत जताकर उस मजनू के गाल पर एक थप्पड़ मार दिया। उस लड़के को यह बिल्कुल सहन नहीं हुआ और उसने रंभा को पकड़ कर जबरदस्ती उसके गाल पर एक चुम्मा अंकित कर दिया।
राजेश बाइक से वहीं से होकर जा रहा था ।लाचार रंभा के साथ होते अत्याचार को वह एकदम सहन नहीं कर पाया और गाड़ी रोक कर उस लड़के से जा भिड़ा।
राजेश से बुरी तरह मार खाते हुए,उस लड़के ने अचानक अपनी जेब से चाकू निकाला और राजेश के पेट में घोप दिया।
राजेश पेट पकड़ कर वहीं नीचे गिर गया ।राजेश पर हुए इस आक्रमण के कारण रंभा में गजब की फुर्ती आ गई ।उसने सड़क पर पड़ा एक पत्थर उठाया और पूरी ताकत से उसे गुंडे लड़के को दे मारा ।पत्थर कमर में जा लगा । और वह लड़का दर्द से कराहता हुआ वही नीचे जा गिरा। इतने में सड़क पर गुजरते लोगों ने राजेश को उठाया तभी किसी राहगीर ने पुलिस को फोन कर दिया था। लोग रंभा के साथ राजेश को अस्पताल ले गए ।
इतने में पुलिस भी आ गई और उस गुंडे लड़के को अपने साथ ले गई।
राजेश का जेपी हॉस्पिटल में इलाज चला ।उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया गया और उसके पेट में ऑपरेशन के बाद टांके डाल दिए गए।
रंभा प्रतिदिन अस्पताल में भर्ती राजेश को देखने को आती। उसके मन में हमेशा यही ख्याल रहता कि राजेश को जो चाकू लगा है, उसी के कारण लगा है। इसी वजह से उसका झुकाव राजेश की तरफ हो गया। उसे राजेश के रूप में अपना भविष्य नजर आने लगा। उसे लगता, जो उसकी रक्षा के लिए मरने मारने पर उतारू हो सकता है वह उसका जीवन भर ठीक से ध्यान रखेगा ।
रंभा के राजेश के माथे पर किए गए आदमी के स्पर्श राजेश को बहुत सुकून देते थे और राजेश की हथेलियां अपने आप रंभा। के हाथों पर जा ठहरती ।
उन दोनों की आंखें बिना बोले ही हजारों बातें करती रहती । ना राजेश ने ही प्रेम का प्रस्ताव किया और ना ही रंभा ने कुछ कहा। पर फिर भी दोनों जानते थे कि दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं।
राजेश तो शुरू से ही रंभा के रूप सौंदर्य का दीवाना था।उनकी यही मुलाकातें अंततः उन दोनों के बीच में गहन प्यार में बदल गईं।
राजेश और रंभा अब एक दूसरे के साथ अपना अधिकांश समय बिताने लगे ।वे मोटरसाइकिल से बहुत दूर तक अक्सर घूमते रहते। कभी भीम बैठका, पातालपानी और कंकाली मंदिर।क्योंकि रंभा भी एक छोटे से शहर शिवनी से यहां पढ़ने के लिए आई थी और किराए का कमरा लेकर रह रही थी ,इसलिए उन दोनों के पास बहुत समय था और घरवालों कोई बंधन भी नहीं था ।उनका प्यार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा था।
पुनीत लगातार अपने दोस्त को देखने के लिए अस्पताल आता रहता था। यहीं पर उसकी मुलाकात रंभा से हुई थी। रंभा इतनी दिलकश थी कि पुनीत के मन में भी रंभा को के प्रति चाहत उत्पन्न हो गई ।वह हमेशा यह प्रयास किया करता था कि वह अधिकतर समय रंभा के साथ गुजार सके। रंभा का हंसमुख व्यवहार उसे यह महसूस कराता, कि यदि वह प्रयास करें तो रंभा को प्राप्त कर सकता है ।
क्योंकि रंभा उसे राजेश का परम मित्र मानकर उसे अपना भी मित्र समझने लगी थी ।इसी कारण उसकी तरफ देखकर हमेशा मुस्कुराती रहती । उससे बात करने में उसे खुशी का अनुभव होता । हालाकि रंभा का यह सामान्य स्वभाव था। पर पुनीत को यह भ्रम हो गया थ कि यदि यदि वह प्रयास करें तो वह इस रूप सुंदरी को प्राप्त कर सकता है।
इसी चक्कर में पुनीत राजेश और रंभा के बीच में लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करने लगा।
एक रोज उसने राजेश से रंभा के बारे में पूछा ।तब राजेश ने उसे बताया कि वह दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करते हैं और पढ़ाई के बाद वह दोनों विवाह के बंधन में बंधने वाले हैं।
यह सब सुनकर पुनीत के मन में होला सा बैठ गया और उसे पहली बार यह महसूस हुआ कि उसका दोस्त राजेश उसे अपनी मंजिल रंभा के प्यार को प्राप्त करने में सबसे बड़ी रुकावट है। इस विचार मात्र से ही उसकी सारी दोस्ती नफरत में बदल गई। हालाकि ऊपरी तौर पर वह राजेश से जुड़ा रहा क्योंकि क्योंकि वह जानता था कि राजेश के माध्यम से ही वह रंभा तक पहुंच सकता है। अंदर से उसके मन में लगातार राजेश रूपी रुकावट को अपने रास्ते से हटाने का ख्याल आने लगा।
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शेष भाग 2 में,,,,
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राजेश और रंभा का प्यार दिन और दिन नई ऊंचाइयां छू रहा था ।इस सबसे पुनीत को बहुत जलन होती थी। उसे हर पल यही लगता की जो रंभा उसकी होनी चाहिए थी वह राजेश की क्यों है। उसके मन में हर पल एक ईर्षा और द्वेष की खिचड़ी सी पकती रहती थी ।जितना राजेश और रंभा एक दूसरे से हंस-हंसकर बात करते, या एक दूसरे की बाहों में होकर प्यार करते, पुनीत को उतना ही ज्यादा कष्ट होता ।पुनीत की हर पल यह कोशिश रहती थी की जहां भी राजेश और रंभा जाएं, वह अवश्य उनके साथ सम्मिलित रहे ।इसी कारण जहां भी राजेश और रंभा जाते ,पुनीत भी राजेश की दोस्ती के नाम पर उनके साथ जरूर ही जाता था ।कभी-कभी रंभा को और राजेश को इससे असहजता महसूस होती। पर पुनीत इस तरह दिखावा करता कि मानो उसे उन दोनों के बीच में होने वाली प्यार भरी बातों से कोई अंतर ही नहीं पड़ता । पर यह पुनीत का दिल ही जानता था कि उसकी प्यारी रंभा कैसे इस दुष्ट राजेश के साथ घुल मिलकर प्यार कर रही है। जब पुनीत के सब्र का प्याला भर गया, तब उसने यह निश्चय किया कि चाहे जो भी हो अब राजेश को हमें रास्ते से हटना ही होगा। इसलिए उसने जंगल के बीच स्थित झींगा फॉल के लिए पिकनिक में जाने के लिए योजना बनाई।
एकांत स्थल पर कुछ पल विताने के ख्याल मात्र से ही राजेश और रंभा ने तुरंत यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। और वे तीनों दो मोटरसाइकिल लेकर पिकनिक मनाने झींगा फल जा पहुंचे। झींगा फॉल घने जंगलों के बीच स्थित बहुत तेजी से बहने वाला एक काई वाला झरना है। जो नीचे गिरकर एक गहरी नदी का रूप ले लेता है और जिसके तेज बहाव में किसी के भी बचने की कोई संभावना नहीं रहती। वहां पर नीचे मगरमच्छ भी बहुत है।
इसलिए वहां कम ही लोग इस जगह को देखने के लिए जाते हैं ।जब वे तीनों वहां पहुंचे तो दिन के लगभग 10:00 बज चुके थे।राजेश और रंभा ऐसी एकांत जगह को देखकर एक दूसरे की बाहों में बांहे डाले हुए एक जगह से दूसरी जगह प्यार भरी बातें करते हुए घूमते रहे। और पुनीत एक पेड़ की घनी छांव में कुछ गाने सुनते हुए चादर बिछा कर लेट गया । वह वह उन दोनों को आपस में प्यार करने का पूरा मौका देना चाहता था। ताकि उन्हें जरा भी शक ना हो कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है।
जब राजेश और रंभा दो-तीन घटे रोमांस और प्यार भरी बातें करके करके निब्रत हुए। तो वे पुनीत के पास चले आए।
इसके बाद उन तीनों ने गपशप करते हुए साथ बैठकर खाना खाया। इसके बाद अपनी योजना के अनुसार राजेश को लेकर पुनीत झरने के बिल्कुल पास चला गया। और उसने राजेश से झरने के पास की चट्टान पर बैठकर सेल्फी लेने को कहा। तब रंबा खाने के बाद बर्तन और समान समेट रही थी और चादर वगैरा पैक कर रही थी।
जब राजेश फोटो लेने चट्टान के पास पहुंचा। नम चट्टान पर हरी काई जमी हुई थी इस कारण वहां बहुत फिसलन थी । पुनीत ने पुनीत ने धीरे से उसके पास पड़ा हुआ एक काफी बड़ा पत्थर राजेश की तरफ लुढ़का दिया। राजेश ने पुनीत को ऐसा करते हुए देख लिया था। राजेश की बिस्फरित आंखों में अपने मित्र के द्वारा किए गए धोखे के कारण आश्चर्य भर गया था।पर अब कुछ हो नहीं सकता था ।पत्थर लुढ़कता हुआ राजेश के ऊपर जा गिरा और राजेश पत्थर के साथ साथ झरने की तीव्र धारा के साथ अतल गहराइयों में जा गिरा। पुनीत ने राजेश!! राजेश!!! चिल्लाते हुए रंभा को हाथ के इशारे से अपने पास बुलाया और रोने का नाटक करते हुए वहीं बैठ कर रह गया । रंभा राजेश के झरने में डूब जाने की की बात सुनकर सुनकर सुन्न हो गई। दो पल में ही उसकी खुशियों का सारा संसार नष्ट हो चुका था। वह पागलों की तरह झरने की धारा को देखती हुई रोती रही।
उसकी निगाहें झरने के जल में प्रति पल राजेश को देख रही थी,खोज रही थी,पर राजेश तो उस अगम जल राशि में न जाने कहां विलीन हो गया था।
पुनीत ने रंभा को बताया की राजेश फोटो खींचने के लिए नीचे चट्टान पर गया था और वहां से अचानक पैर फिसल जाने के कारण वह झरने में गिर गया।
उन दोनों ने काफी कोशिश की पर राजेश को वहां न मिलना था और ना वह उन्हें मिला। उन दोनो ने पुलिस थाने जाकर राजेश के पानी में गिरने की सूचना दी। पुलिस ने भी गोताखोरों के साथ काफी देर तक पानी में जाल डाले पर राजेश को कहीं पता नहीं चला। तब सभी लोगों ने यह मान लिया कि शायद राजेश को मगर ने खा लिया होगा।
इस घटना के बाद से रंभा बहुत ज्यादा टूट गई थी। पर दोस्ती का ढोंग कर पुनीत अब रंभा के और भी ज्यादा पास आता गया ।रंभा जितना ज्यादा उदास और दुखी होती ,पुनीत उसे सांत्वना देने के ढोंग करते-करते हुए उसके उतने ही पास जाने की कोशिश करता। धीरे-धीरे समय के साथ-साथ पुनीत रंभा को रंभा को अपने सांचे में ढालने लगा और उन दोनों का साथ साथ धीरे-धीरे प्रगाढता में बदलता चला गया।
एक दिन पुनीत ने कोका कोला की बोतल में शराब और कुछ नशीली दवा मिलाकर रख ली और जब रंभा उसके घर आई तो उसने रंभा को कोका-कोला मिली शराब पिला दी और जब रंभा नशे में हो गई तो उसने प्यार की बातें करते हुए रंभा के साथ शारीरिक संबंध भी बना लिए। और उसकी मोबाइल में वीडियो रिकॉर्डिंग भी करली।
रंभा रातभर पुनीत के कमरे में ही पड़ी सोती रही। सुबह जब उसने अपने आप को बिना वस्त्र के पूर्ण नग्न अवस्था में पुनीत के साथ सोए हुए देखा ,तो उसे सारी बात समझ में आ गई। उसने पुनीत से झगड़ा भी किया।पुनीत ने दुष्टता से हंसते हुए उसे वीडियो क्लिप दिखा कर कहा कि मैं जो कहता हूं वही करती रहो। अन्यथा यह सारी वीडियो क्लिप मैं वायरल कर दूंगा और तुम कहीं की भी नहीं रहोगी।
ऐसा सुनकर रंभा अपने आप को मकड़ी के जाले में फसी हुई मक्खी की तरह महसूस करने लगी।
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उस दिन झरने से गिरकर राजेश मरा नहीं था बल्कि वह पानी के साथ बहुत दूर तक बहता चला गया था ।अत्यधिक घायल होने के साथ-साथ वह कोमा में भी चला गया था उसे गांव के लोगों ने गांव के वैद्य जी के पास इलाज के लिए रख दिया । 15 दिन बाद जब वह स्वस्थ हुआ और होश में आया ,तो गांव वालों की मदद से वह भोपाल जा पहुंचा और वहां पहुंचकर उसने सीधे थाने में जाकर पूरे घटनाक्रम के बारे में रिपोर्ट लिखाई। पुलिस इंस्पेक्टर बत्रा जी ने तुरंत पुनीत के घर जाकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
जब राजेश रंभा के पास पहुंचा तो राजेश को जिंदा देखकर वह खुशी से रोते हुए उसके गले से लग गई और उसने पुनीत के द्वारा किए गए दुष्कृत्य और ब्लैकमेलिंग के बारे में सब कुछ बता दिया।
राजेश ने रंभा के साथ जाकर पुनीत के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत भी दर्ज करवा दी। पुनीत के मोबाइल से रंभा के साथ बलात्कार की वह सारी क्लिप पुलिस ने जप्त कर ली। अब पुनीत के बचने का कोई उपाय नहीं था।
कोर्ट में काफी दिनों तक यह केस चलता रहा और अंत में पुनीत को उसकी करने का पूरा दंड मिला।
राजेश ने रंभा से शादी करके करके एक नई जिंदगी शुरू कर दी।
