लेखक: विक्टर द्रागून्स्की अनुवाद: आ. चारुमति रामदास लेखक: विक्टर द्रागून्स्की अनुवाद: आ. चारुमति रामदास
एक खूबसूरत प्रेमकथा...। एक खूबसूरत प्रेमकथा...।
एक लघुकथा...। एक लघुकथा...।
जिन्दगी बोझल सी बेमन सी हो गई थी दूर तक देखने पर भी न कोई राह न मंजिल मिल रही थी, जिन्दगी बोझल सी बेमन सी हो गई थी दूर तक देखने पर भी न कोई राह न मंजिल मिल रही थी...
तेज गति से दौड़ रही ट्रेन अचानक रूकी । एक झटका – सा लगा और मैं अपनी तन्द्रा से बाहर आया । शायद कोई स... तेज गति से दौड़ रही ट्रेन अचानक रूकी । एक झटका – सा लगा और मैं अपनी तन्द्रा से ब...
मैं उसे नहीं छोड़ना चाहता था, मैं उसे बिलकुल नहीं जाने देना चाहता था। लेकिन देर हो रही थी और श्मशान ... मैं उसे नहीं छोड़ना चाहता था, मैं उसे बिलकुल नहीं जाने देना चाहता था। लेकिन देर ...