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Vijay Kumar Vishwakarma

Others

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Vijay Kumar Vishwakarma

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ब्लैक

ब्लैक

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मोहल्ले की सभी लड़कियां मजनू से परेशान थीं । मजनू बिल्कुल अपने नाम पर गया था । दिलफेंक आशिक । लड़की देखते ही उसका आँख मारना शुरू हो जाता । मोहल्ले भर की लड़कियां उसकी ओर देखना ही बंद कर दीं मगर कभी अन्जाने में भी नजरें टकरा जातीं तो वह झट से आँख मार देता, जैसे आँख मारने के लिए तके बैठा रहा हो ।


मजनू से परेशान हो चुकी लड़कियों के घर की बुजुर्ग महिलाएँ उसके मरहूम बाप को कोसतीं । उसी ने किसी फिल्मी हीरो को पर्दे पर मजनू भाई के नाम से भूमिका निभाते देख, उन्हीं दिनो पैदा हुए अपने बेटे का नाम मजनू रखा था ।


दिन हो या रात मोहल्ले के तिगड्डे पर अपने हमउम्र आवारा दोस्तों के साथ मजनू गालियों भरी गुफ्तगू में मगन रहता । उन रास्तों से गुजरने वाली लड़कियां उन्हें अनदेखा कर सिर झुकाकर निकलतीं तो मजनू अपने स्मार्टफोन पर, आँख मारे ओ लड़का .... या फिर एक आँख मारूं तो .... जैसे बेहूदा फिल्मी गाने बजाने लगता । लड़कियां उसे मन ही मन कोसते हुए तेजी से आगे बढ़ जातीं । कई बार उसकी पुलिस में शिकायत भी हुई लेकिन हर बार उसकी माँ मोहल्ले वालों के पैर पकड़कर, बिना बाप के एकलौते बेटे की दुहाई देकर मामला रफा दफा करा देती ।


देशभर में महामारी फैली तो मजनू से त्रस्त लड़कियों को यही लग रहा था कि उस आवारा मवाली के संक्रमित होने की संभावना सबसे ज्यादा है । मगर वह पूरे लाॅकडाउन में बिना मास्क लगाये बेखौफ घूमता रहा । दूर से पुलिस वाहन के सायरन की आवाज सुनकर वह कहीं दुबक जाता और गाड़ी के गुजर जाने के बाद वह पुनः अपने रंग ढ़ंग में नजर आने लगता ।


जब दूसरी बार महामारी का विकराल रूप फैला तो लापरवाह मजनू उसकी चपेट में आ गया । उसके अस्पताल में भर्ती होने की खबर से कोई हैरान या दुखी नही हुआ सिवाय उसकी माँ के । उसकी माँ आंगनबाड़ी सहायिका थी । वो जो भी कमाई थी वह सब मजनू के इलाज में खर्च कर दी । उसकी ममता का कवच मजनू को महामारी के मौत के मुंह से बाहर निकाल लाया ।


मोहल्लेवासियों को उम्मीद थी कि मौत को करीब से देख चुके मजनू की हरकत में सुधार होगा और वह लड़कियों को बुरी नजर से नही देखेगा । लेकिन लोगों की यह सोच गलत साबित हुई । रहमदिली से तरस खाकर उसकी ओर देखने वाली लड़कियों से नजर मिलते ही वह पहले की तरह आँख मारने लगा । लड़कियां मन ही मन उसे जी भर कर कोसते हुए सिर फेर लेतीं ।


वह अपने आवारा दोस्तो के सामने महामारी से बाल भी बांका न होने की डींगे मारता और बेसिर पैर की अफवाहें फैलाता । धीरे धीरे उसकी तबियत फिर बिगड़ने लगी मगर वह लापरवाही बरतते हुए छेड़खानी की जुगत में लगा रहा ।

जब उसकी हालत ज्यादा बिगड़ गई तो उसकी माँ उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराई । डॅाक्टरो ने परीक्षण करके बताया कि उसे ब्लैक फंगस हो गया है । कई दिनों तक उसका इलाज चला । डाॅक्टरों ने उसकी जान तो बचा लिया मगर उन्हें उसकी खराब हो चुकी आँखें निकालनी पड़ी ।


रंगीन मिजाज मजनू को बिना आँखों के अब बस एक ही रंग नजर आता, और वो है - ब्लैक ।


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