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Jyoti Dhankhar

Others

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Jyoti Dhankhar

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बेचारी पत्नी

बेचारी पत्नी

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दिन के ग्यारह बजे थे और शन्नो तेजी से 809 वाली मेमसाहब का काम निबटा रही थी अभी तो उसको चार घरों में और जाना था।

इतनी देर में ही उसका फोन बजा, फोन उठाया तो किसी अजनबी की आवाज थी की आप सरकारी अस्पताल पहुंचो आपके पति का एक्सीडेंट हो गया है।


शन्नो की रुलाई छूट गई, समस्या ये थी कि अब बच्चों का स्कूल में दाखिला कराना था और अब ये करमजला फिर दारू पी के एक्सीडेंट करवा के बैठ गया है। छुट्टियां लेनी पड़ेगी और ये मेमसहाब लोग भी पैसा काटेंगी। 


चार महीने पहले भी मेरे बीस हजार लगवा दिए थे शराबी ने। 


बड़बड़ करती अस्पताल की तरफ भागी, सोच रही थी की मरने की दुआ भी ना कर सकती और उधर से खाते में जो मुश्किल से दस हजार इकट्ठा किया था वो जाता दिख रहा था।


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