STORYMIRROR

Ira Johri

Children Stories

3  

Ira Johri

Children Stories

बचपन और नानी का घर

बचपन और नानी का घर

2 mins
819

बच्चों की शैतानियाँ से परेशान सुमि ने जो बच्चों को डाँट लगाई तो वो बोले “हम नानी के घर चले जायेंगे “सुमि को नींद आ रही थी तो ग़ुस्से में कह दिया “जाओ चले जाओ “और चद्दर तान कर सो गयी।

आँख खुली देखा तो बच्चे घर में हैं ही नहीं। अब वह परेशान हो गयी अभी हाल में ही दोनो को नयी साइकिलें भी दिलवाईं थी वह भी नहीं थी। अब सारी नींद हवा हो चुकी थी बाहर निकली घर में फोन या मोबाइल नहीं था तो किसी से पता भी नहीं लगा सकती थी करे तो क्या करे शाम के समय पति के घर आने का इन्तजार करने लगी और आते ही सब मिल कर ढूँढने लगे। नानी से पूछने का प्रश्न ही नहीं उठता था क्योंकि वह घर बारह किलोमीटर दूर था और वहां ख़बर करने पर वो भी परेशान हो जातीं बच्चों की आयु कोई दस व बारह वर्ष की रही होगी तो अकेले वो साइकिल से इतनी दूर जा भी सकते हैं यह कोई सोच ही नहीं सकता था। घबराहट के मारे सबकी जान निकल रही थी तभी किसी ने सलाह दी कि थाने मे ख़बर कर दो। लड़के भी चोरी होते है।


 सब लोग मिल कर जैसे ही थाने जाने के लिये निकले देखा दोनों भाई साइकिल चलाते हुये चले आ रहे हैं। उनको देख कर सबकी जान में जान आई पूछा कि “कहाँ चले गये थे “मासूमियत भरा जवाब आया कि “नानी के घर “ ये देखो नानी ने साथ में अचार और चटनी भी भेजे हैं।अम्मा ने ही तो कहा था जाओ चले जाओ और हम चले गये। और फिर बच्चों के सकुशल घर वापस आने पर जब नानी को ख़बर दी गयी तो वो बोलीं “दरवाज़े पर खटपट सुन कर देखा तो दोनो पसीने से लथपथ खड़े थे चाह कर भी प्यार नहीं कर सकते थे। तो झूठा ग़ुस्सा दिखाया और वहाँ सब चिन्ता कर रहे होंगे तो कुछ खिला पिला कर आराम कराये बग़ैर हमने अचार चटनी के साथ यह कह कर भेज दिया कि कुछ गिरना नहीं चाहिये जिससे सब आहिस्ता से बिना शैतानी किये सुरक्षित घर पहुँच जायें और दोबारा ऐसी शैतानी ना करें ।


Rate this content
Log in